भारत में चारों पीठों के शंकराचार्यों का कैसे होता है चयन? जानिए इस पद की अहमियत और इसके नियम
शंकराचार्य बनने के लिए कुछ योग्यताएं जरूरी होती है. जैसे कि वह त्यागी ब्राम्हण हो, ब्रह्मचारी हो, दंडी सन्यासी हो, संस्कृत, चतुर्वेद, वेदांत और पुराणों का ज्ञाता हो और राजनीतिक न हो. ऐसे गुण वाले शिष्य को ही शंकराचार्य बनाया जाता है.
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अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. इसे लेकर जोर-शोर से तैयारी की जा रही है. कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए देश के कई धार्मिक गुरुओं के साथ-साथ राजनीतिक, क्रिकेट और बॉलीवुड हस्तियों को भी न्योता भेजा गया है. इसी बीच देश के चारों शंकराचार्य के नाम भी काफी चर्चाओं में हैं. ऐसी चर्चा है कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कोई भी शंकराचार्य शामिल नहीं होंगे. ऐसे में लोगों के मन में शंकराचार्य को लेकर तरह-तरह के सवाल आ रहे हैं कि आखिरकार शंकराचार्य कौन होता है और इनका चयन कैसे होता है. इसकी जानकारी खुद ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दी है.
