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महोबा जिले में कौमी एकता की मिसाल बने दो मुस्लिम युवक, दोनों करते हैं सुंदरकांड का पाठ

नाहिद अंसारी

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उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के महोबा जिले के दो मुस्लिम युवक कौमी एकता की मिसाल बन कर उभरे हैं. यह दोनों पूरे जिले में सुंदरकांड का पाठ पढ़ते देखे जाते हैं. यह दोनों पिछले कई सालों से हिंदू समुदाय के लोगों के साथ सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं. मुहम्मद जहीर और सुलेमान नाम के इन दोनों मुस्लिम युवकों के लिए हिंदू, मुस्लिम के बीच न कोई मजहब की दीवार और न कोई भेदभाव की भावना है. दोनों मुस्लिम शख्स कार्यक्रम में हिन्दू समाज के साथ वर्षों से सुंदरकांड का पाठ करते हैं.

हिन्दू मुस्लिम एकता और ईश्वर एक की धारण रखने वाले ये दोनों मुस्लिम व्यक्ति साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है और तमाचा है उन लोगों पर जो धर्म के नाम पर इंसानियत को बांटकर आपसी भाईचारे के लिए नासूर बनते हैं.

सुंदरकांड का पाठ करने वाले सुलेमान के पिता बसीर चच्चा, जो कि खुद भी रामलीला में बाणासुर का अभिनय करते रहे थे. उन्होंने मरने से पहले अपने लड़कों को बताया था कि मेरी मौत के बाद चलीसमा भी करना और तेरहवीं भी करना जो कि इनके लड़कों के द्वारा किया गया था. कुलपहाड़ तहसील के सुगिरा गांव सहित जिले में कहीं भी सुंदरकांड होता है, वहां इन्हें बुलाया जाता है. ये ईश्वर को एक मानते हैं.

सोमवार रात को गांव के ही अमित द्विवेदी के घर में पाठ सुंदरकांड का पाठ हुआ था, जिसमें यह दोनों मुस्लिम युवकों को पाठ पढ़ते देख कर लोग अचंभित रह गए थे. आज के इस नफरत के माहौल में भी यह दोनों मुस्लिम युवक कौमी एकता की मिशाल बने हुए हैं. हिंदू-मुस्लिम भाई चारे को मजबूत कर रहे हैं. ढोल मजीरा के बीच भक्ति में डूबे माहौल में इस दो मुस्लिम युवकों का सुंदरकांड का पाठ करना सभी को भा गया.

मुहम्मद जहीर बताते है कि वो वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं. हम हिन्दू-मुस्लिम एक है और एक ही रहेंगे. जिनको राजनीति की रोटियां सेंकना है वो हिन्दू-मुस्लिम में भेद डाल रहे हैं. हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं. हम हिन्दू-मुस्लिम एक समान है और ईश्वर एक है.

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वहीं सुलेमान ने बताया कि वो भी 16 वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं. हमारे गांव में हिन्दू-मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं और मिलकर रहते हैं और एक दूसरे के त्यौहार में भी शामिल होते हैं. उनकी मानें तो बुरे वक्त में हिन्दू भाई उनकी मदद भी करते हैं. वो बताता है कि उसके पिता भी रामलीला में किरदार निभाया करते थे और उनसे ही सांप्रदायिक सौहार्द की सीख मिली है.

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