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बस्ती पहुंचा 308 पहियों वाला ‘बाहुबली ट्रक’, 200 टन का वेसल लेकर चल रहा काफिला, देखने उमड़ा जनसैलाब

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इसे ‘बाहुबली ट्रक’ के नाम से जाना जा रहा है. अब यह ट्रक बस्ती जिले में पहुंच गया है, जहां इसे देखने के लिए सड़कों और हाईवे के किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट रही है.

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Basti 'Bahubali Truck' News
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Basti 'Bahubali Truck' News: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इसे ‘बाहुबली ट्रक’ के नाम से जाना जा रहा है. अब यह ट्रक बस्ती जिले में पहुंच गया है, जहां इसे देखने के लिए सड़कों और हाईवे के किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट रही है. लोग इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस ट्रक की चर्चा हो रही है. आखिर इस ट्रक में ऐसा क्या खास है कि इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह इसके 308 पहिए और इस पर लदा करीब 200 टन का विशाल वेसल है.

पारादीप पोर्ट के रास्ते यूपी पहुंचा

इस बाहुबली ट्रक का सफर बेल्जियम से शुरू हुआ. समुद्री रास्ते से इस भारी-भरकम मशीन को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतारा गया. इसके बाद सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार के अलग-अलग रास्तों से गुजरते हुए यह काफिला उत्तर प्रदेश पहुंचा. अब बस्ती जिले से गुजरते समय यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. ट्रक के साथ चल रहे मैनेजर के मुताबिक, इस विशालकाय हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर में कुल 308 पहिए लगे हैं. इसे करीब 20 विशेष ट्रॉलियों को आपस में जोड़कर तैयार किया गया है. इसका विशाल आकार सड़क पर गुजरने वाले लोगों को हैरान कर रहा है.

200 टन का वेसल, लंबाई करीब 100 फीट

इस ट्रक पर कोई सामान्य सामान नहीं, बल्कि एक विशाल वैक्यूम वेसल यानी बॉयलर लदा हुआ है. इसका वजन करीब 200 टन, लंबाई लगभग 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से भी ज्यादा बताई गई है. इस महाकाय वेसल को बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है. वहां इसका इस्तेमाल एथेनॉल और एशिया के पहले बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के निर्माण कार्य में किया जाएगा. इतनी बड़ी मशीन को सड़क के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है. यही वजह है कि इसके पूरे सफर के दौरान विशेष तकनीकी व्यवस्था की जा रही है.

संकरे रास्तों पर भी निकलता है ट्रेलर

बाहुबली ट्रक की खासियत सिर्फ इसके आकार और पहियों की संख्या तक सीमित नहीं है. इसके पहियों को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा जा सकता है. इसी तकनीक की मदद से इतने बड़े ट्रेलर को तंग और संकरे रास्तों से निकालने में आसानी होती है. हालांकि, भारी वजन के कारण इसकी रफ्तार बेहद धीमी रहती है. यह रोजाना करीब 10 से 20 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाता है और रात के समय इसे रोक दिया जाता है. ट्रक में लगभग 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक है. इसके साथ करीब 14 गाड़ियों का काफिला भी चल रहा है, जिसमें क्रेन, हाइड्रा, जेसीबी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम शामिल है.

रास्ते में बिजली के तार और पेड़ हटाने की चुनौती

बस्ती और आसपास के इलाकों से इस विशालकाय ट्रेलर को सुरक्षित निकालना प्रशासन और तकनीकी टीम के लिए बड़ी चुनौती है. रास्ते में आने वाले हाईटेंशन बिजली के तारों को हटाना पड़ रहा है. कई जगहों पर पेड़ों की छंटाई भी करनी पड़ रही है. जरूरत के मुताबिक कुछ स्थानों पर पुल या फुट-ओवर ब्रिज के हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाने या उठाने की व्यवस्था करनी पड़ती है. जहां सड़क संकरी मिलती है, वहां पहले तकनीकी टीम पहुंचकर रास्ते का जायजा लेती है और जरूरी इंतजाम करती है. इसके बाद ही ट्रेलर को आगे बढ़ाया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में सावधानी और तकनीकी निगरानी की अहम भूमिका है.

बाहुबली ट्रक देखने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह

बस्ती जिले में इस ट्रक के पहुंचते ही इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया. हाईवे के किनारे लोग खड़े होकर इसकी तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं. सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर भी इस विशालकाय ट्रेलर की रील्स बनाते नजर आ रहे हैं. कई लोग दूर-दूर से सफर तय करके इसे देखने पहुंच रहे हैं. 308 पहियों पर धीरे-धीरे आगे बढ़ते इस ट्रक को देखकर लोग हैरान हैं. इसका आकार और इस पर लदा भारी-भरकम वेसल लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है.

हर मूवमेंट पर लोगों की नजर

उत्तर प्रदेश की सड़कों से गुजर रहा बाहुबली ट्रक अब लोगों के बीच खास आकर्षण बन चुका है. इसके सफर में हर मोड़ पर तकनीकी तैयारी और सावधानी की जरूरत पड़ रही है. बस्ती के हरदिया गांव के ग्राम प्रधान और स्थानीय निवासी रितेश ने भी इस ट्रक को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. फिलहाल इस विशालकाय ट्रेलर को बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचाया जाना है, जहां वेसल का इस्तेमाल एथेनॉल और बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के निर्माण कार्य में होगा. अपने अनोखे आकार, 308 पहियों और भारी वेसल के कारण यह ट्रक लगातार लोगों का ध्यान खींच रहा है.

(सतीश श्रीवास्तव के इनपुट से)