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इन 3 राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती, सावन में करें ये अचूक उपाय तो दूर होंगे कष्ट

सावन मास में भगवान शिव की आराधना से शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलती है. वर्तमान में मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है.

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30 जुलाई से पावन सावन मास की शुरुआत हो चुकी है.यह पवित्र महीना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का ही समय नहीं है बल्कि शनिदेव की वक्र दृष्टि और ग्रहों के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने का सबसे सिद्ध अवसर भी माना जाता है.
 

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शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव स्वयं शनिदेव के परम गुरु हैं. ऐसे में सावन के महीने में महादेव की उपासना करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट स्वतः ही शांत होने लगते हैं.वर्तमान में मेष,मीन और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का साया है.
 

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सावन में प्रतिदिन या विशेष रूप से सोमवार और शनिवार को जल में थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें. इसके साथ ही भगवान शिव को शमी पत्र और बेलपत्र चढ़ाएं. चूंकि शमी का पौधा शनिदेव से संबंधित है, इसलिए इसे शिवजी पर चढ़ाने से शनि दोषों का शमन होता है.
 

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शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें. क्योंकि हनुमान जी के भक्तों को शनिदेव कष्ट नहीं देते. इसके अलावा सावन के हर शनिवार को सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें.
 

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शनिवार की सुबह एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर इस तेल को किसी गरीब को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आएं. ज्योतिष में 'छाया दान' को साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों को कम करने का सबसे अचूक और प्रभावी उपाय माना गया है.
 

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सावन के दौरान रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन ॐ शं शनैश्चराय नमः अथवा शिवजी के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. यह जाप मानसिक तनाव, शारीरिक व्याधियों और शनि के प्रतिकूल प्रभावों को दूर कर जीवन में शांति लाता है.
 

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शनिदेव कर्मफल दाता हैं. सावन में काले उड़द, काले जूते, छाता, तिल या काले वस्त्रों का गरीबों और जरूरतमंदों में दान करें. किसी वृद्ध, असहाय या मजदूर का अपमान करने से बचें और यथासंभव उनकी मदद करें.