हाथरस को अलीगढ़ से अलग कर जिला बनाने वाले रामवीर उपाध्याय नहीं रहे, जानें इनकी पूरी कहानी

हाथरस को अलीगढ़ से अलग कर जिला बनाने वाले रामवीर उपाध्याय नहीं रहे, जानें इनकी पूरी कहानी
तस्वीर: यूपी तक.

Ramveer upadhyay news: हाथरस को अलीगढ़ से अलग करके जिला बनाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय का निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. शुक्रवार यानी 02 सितंबर की देर शाम उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों में मायूसी छाई हुई है. आपको बता दें कि हाथरस जिले की सादाबाद सीट से 5 बार विधायक बनने वाले रामवीर उपाध्याय को इस बार यानी 2022 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. चुनाव हारने से पहले ही वह बीमार चल रहे थे. आप इस खबर की शुरुआत में टॉप पर शेयर कर वीडियो में उनके राजनीतिक सफर के बारे में देख सकते हैं.

अहम बिंदु

रामवीर उपाध्याय 1993 में गाजियाबाद से वकालत छोड़कर हाथरस की राजनीति में आए थे. वह पहला चुनाव निर्दलीय लड़े और हार गए, लेकिन उसके बाद 1996 में वह बसपा से हाथरस विधानसभा से विधायक बने. बसपा की सरकार बनी तो वह पहली बार में ही कैबिनेट मंत्री बने और परिवहन विभाग जैसा मंत्रालय संभाला. 1997 में उन्होंने हाथरस को बसपा सुप्रीमो मायावती से कहकर जिला बनवा दिया. उसके बाद 2002 में रामवीर फिर से हाथरस विधानसभा से चुनाव लड़े और रालोद प्रत्याशी देव स्वरूप शर्मा को हरा दिया.

फिर बसपा सरकार में परिवहन और ऊर्जा जैसे दो महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. तीसरी बार रामवीर फिर बसपा से ही मैदान में उतरे और फिर रालोद प्रत्याशी देवेन्द्र अग्रवाल को हराकर विधानसभा पहुंच गए. फिर तीसरी बार कैबिनेट मंत्री बने और ऊर्जा मंत्रालय मिला. 2012 में हाथरस विधानसभा सीट सुरक्षित होने के कारण वह सिकंदराराऊ विधानसभा पहुंच गए. वहां बसपा का कोर वोटर न होने के बाद भी उन्होंने यशपाल सिंह चौहान को करीब एक हजार वोट से हर दिया.

पांच साल तक विधायक रहने के बाद रामवीर ने सादाबाद विधानसभा को अपनी राजनीति के लिए चुन लिया और 2017 में वह फिर यहां से बसपा के उम्मीदवार बने और सपा प्रत्याशी देवेन्द्र अग्रवाल को हराया. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीमारी की हालत में उन्होंने भाजपा की सदस्यता अपने आगरा आवास पर ही ली. पार्टी ने उन्हें सादाबाद से मैदान में उतार दिया, लेकिन बीमार होने के कारण वह प्रचार नहीं कर सके. वह सिर्फ एक दिन गाड़ी में थोड़ी देर के लिए रोड शो में आए. नतीजा ये निकला कि उन्हें 2022 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

हाथरस जिले की सभी सीटों से विधायक रहने वाले रामवीर उपाध्याय का जन्म हाथरस के बामोली गांव में 1957 में हुआ था. उनकी शिक्षा हाथरस जिले में हुई. फिर एलएलबी करके उन्होंने मेरठ और गाजियाबाद में वकालत भी की. 1991 के चुनाव से पहले वे क्षेत्र में सक्रिय हुए. 1996 में वह हाथरस से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े, जीते और पहली ही बार में मायावती के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने.

2017 में रामवीर सादाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने और उन्हें जिले की सभी सीटों से भी विधायक रहने का श्रेय हासिल है. उनकी पत्नी पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय हाल ही में बीजेपी में शामिल हुई हैं जो जिला पंचायत की अध्यक्ष है. उसके बाद उन्हें बीएसपी से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली.

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