2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में लगे झटकों के बाद भारतीय जनता पार्टी अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गई है. गाजीपुर, बलिया, जौनपुर और आजमगढ़ जैसे समीकरणों के बीच देवरिया से बीजेपी अपना सांसद बचाने में कामयाब रही थी. हालांकि अब देवरिया जिले की बरहज विधानसभा सीट पर 2027 की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर ही जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. बरहज सीट का एक अनोखा और ऐतिहासिक टैबू रहा है. यहां कभी कोई विधायक रिपीट नहीं होता यानी जनता हर बार चेहरा बदल देती है. इस मिथक के बीच वर्तमान बीजेपी विधायक दीपक मिश्रा 'शाका' के सामने जहां अपनी सीट बचाने की चुनौती है वहीं बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों में ही नए चेहरों की लंबी कतार लग चुकी है.
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बरहज का दिलचस्प इतिहास: कभी नहीं दोहराता विधायक का चेहरा
बरहज विधानसभा सीट की सबसे बड़ी खासियत यहां का राजनीतिक इतिहास है. इस सीट पर भले ही पार्टी दोबारा चुनाव जीत जाए लेकिन जनता या पार्टियां प्रत्याशी का चेहरा जरूर बदल देती हैं. 2022 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर दीपक मिश्रा 'शाका' यहां से विधायक चुने गए थे. अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बीजेपी इस बार इस टैबू को तोड़ते हुए दीपक मिश्रा 'शाका' पर दोबारा दांव लगाएगी या परंपरा के मुताबिक किसी नए चेहरे को मैदान में उतारेगी. इसी अनिश्चितता के चलते यहाँ बीजेपी से दावेदारों की संख्या अचानक बढ़ गई है.
बीजेपी में टिकट की रेस: दिग्गजों से लेकर महिला कोटे तक दावेदारी
बरहज में बीजेपी के भीतर टिकट पाने वालों की एक लंबी सूची तैयार हो चुकी है.
दीपक मिश्रा 'शाका': वर्तमान विधायक होने के नाते वे स्वतः ही स्वाभाविक दावेदार के रूप में अपनी ताल ठोक रहे हैं.
श्वेता जायसवाल: नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल को महिला प्रत्याशी के तौर पर और स्थानीय पकड़ के कारण एक बेहद मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
भूपेंद्र सिंह: बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष, जिनकी लखनऊ के शीर्ष नेतृत्व में अच्छी पकड़ मानी जाती है.
संजय तिवारी: पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश तिवारी के बेटे, जो अपने पारिवारिक राजनीतिक रसूख के दम पर दावेदारी कर रहे हैं.
अन्य प्रमुख नाम: बीजेपी प्रवक्ता एस.ए. सिंह, नरेंद्र मिश्रा 'पप्पू', अमरेंद्र गुप्ता, नीरज साही, श्याम सुंदर जायसवाल और अवनीश उपाध्याय जैसे नेता भी खुले तौर पर पार्टी से टिकट की मांग कर रहे हैं.
समाजवादी पार्टी में कड़ा मुकाबला
लगातार दो बार से बीजेपी के कब्जे वाली इस सीट को छीनने के लिए समाजवादी पार्टी भी किसी मजबूत चेहरे की तलाश में है. सपा के भीतर मुख्य मुकाबला दो बड़े चेहरों के बीच देखने को मिल रहा है.
कनकलता सिंह: पूर्व राज्यसभा सांसद और सपा के दिवंगत दिग्गज नेता मोहन सिंह की बेटी अपनी मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि और वरिष्ठता के कारण वे सबसे प्रबल दावेदारों में शामिल हैं.
मुरली जायसवाल: पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर रनर-अप (दूसरे नंबर पर) रहकर तगड़ी फाइट देने वाले मुरली जायसवाल अब सपा में आ चुके हैं. चुनावी अनुभव और जनाधार के बूते उनकी दावेदारी भी बेहद मजबूत है.
अन्य दावेदार: पिछला टिकट कटने के चलते सहानुभूति की उम्मीद लगाए विजय रावत और गेनालाल यादव भी सपा से टिकट की रेस में बने हुए हैं.
निर्दलीय और अन्य समीकरण
पार्टी सिंबल की इस लड़ाई के बीच पूर्व चेयरमैन उमाशंकर सिंह 'उमेश' भी पूरी तरह चुनावी मूड में हैं. फिलहाल उनके पास किसी दल का सिंबल नहीं है. लेकिन वे सही राजनीतिक हवा और किसी बड़े दल के समर्थन के इंतजार में हैं.
2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और सपा किस प्रत्याशी पर अपना भरोसा जताती हैं और क्या बरहज की जनता अपना 'विधायक न दोहराने' का सालों पुराना टैबू तोड़ेगी, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा.
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