2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बाहुबली नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का कैमरों के सामने दिया गया एक बयान खूब गूंजा था "अगर प्रतीक भूषण चुनाव हार गए तो समझिए बीजेपी चुनाव हार गई." चुनाव नतीजे आए और उनके बेटे प्रतीक भूषण चुनाव जीत भी गए. लेकिन जीत का मार्जिन महज 6700 वोटों का रहा.
ADVERTISEMENT
अब सवाल यह है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी एक बार फिर गोंडा सदर से प्रतीक भूषण पर ही दांव लगाएगी? वहीं दूसरी तरफ, मात्र 6,700 वोटों से पिछड़ने वाले सपा प्रत्याशी सूरज सिंह को क्या अखिलेश यादव दोबारा मैदान में उतारेंगे? आइए समझते हैं गोंडा सदर का सियासी गणित और यहां की दावेदारी.
गोंडा सदर का इतिहास: पंडित सिंह का दबदबा और बीजेपी की एंट्री
गोंडा सदर सीट पर दशकों तक समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता रहे पंडित सिंह (विनोद कुमार सिंह) का एकछत्र राज देखने को मिला. 1993 के बाद से वे यहां से तीन बार विधायक चुने गए.
2017 का फेरबदल: पंडित सिंह के निधन के बाद 2017 के चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने बीजेपी के टिकट पर 1993 के बाद पहली बार यहां कमल खिलाया.
2022 की कांटे की टक्कर: 2022 में प्रतीक भूषण ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और सपा प्रत्याशी सूरज सिंह को 6,700 वोटों के कड़े मुकाबले में हराया.
बीजेपी का समीकरण: प्रतीक भूषण की दावेदारी पक्की या नया चेहरा?
बीजेपी की ओर से मौजूदा विधायक प्रतीक भूषण सिंह का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है.
दावेदारी की वजह: 2017 में लंबे अरसे बाद बीजेपी का खाता खोलना, दो बार से लगातार विधायक रहना और पिता बृजभूषण शरण सिंह का मजबूत राजनीतिक रसूख.
अन्य दावेदार: बीजेपी से सिटिंग विधायक होने के बावजूद टिकट मांगने वालों की कमी नहीं है. पूर्व में शिवसेना से चुनाव लड़ चुके महेश नारायण तिवारी (महेश तिवारी) भी बीजेपी टिकट की रेस में अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं.
क्या रिस्क लेगी बीजेपी?: जानकारों का मानना है कि सिटिंग विधायक और बृजभूषण शरण सिंह के दबदबे को देखते हुए बीजेपी द्वारा प्रतीक भूषण का टिकट काटने की संभावना बेहद कम है.
सपा का मंथन: सूरज सिंह को रिपीट का मौका या कोई नया दांव?
लगातार दो बार से हार का सामना कर रही समाजवादी पार्टी में इस बार टिकट के लिए घमासान और दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है.
सपा का PDA व सवर्ण गणित: समाजवादी पार्टी का अंदरूनी समीकरण यह मानकर चल रहा है कि अल्पसंख्यक वोट बैंक उनके साथ है, ऐसे में किसी सवर्ण (खासकर ब्राह्मण) चेहरे को उतारकर वे बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं.
बीएसपी की चाल और इंडिया गठबंधन का रुख
बीएसपी (BSP) की रणनीति: यदि समाजवादी पार्टी किसी मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव नहीं लगाती है तो बहुजन समाज पार्टी यहां मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है. बीएसपी से पूर्व विधायक जलील खान के बेटे (जमील खान) टिकट के लिए सबसे आगे दौड़ लगा रहे हैं.
इंडिया गठबंधन: गोंडा में कांग्रेस का जनाधार सीमित होने के कारण गठबंधन के तहत गोंडा सदर की यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में ही जाना तय है.
2027 के चुनाव में गोंडा सदर सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी के प्रतीक भूषण सिंह और सपा के सूरज सिंह या किसी नए ब्राह्मण चेहरे के बीच होने के पूरे आसार हैं. क्या अखिलेश यादव पंडित सिंह की विरासत पर दोबारा भरोसा जताएंगे या कोई नया प्रयोग करेंगे? और क्या बृजभूषण शरण सिंह का किला एक बार फिर अभेद्य रहेगा? इन सभी सवालों का जवाब 2027 की चुनावी बिसात पर ही मिलेगा.
ADVERTISEMENT











