MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा ने अपने घोषित उम्मीदवार कमलेश यादव का टिकट काटकर बीजेपी के बागी डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बना दिया है. संजयन त्रिपाठी बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद बागी हो गए थे.अब वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. सपा के इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मणों के साथ-साथ बीजेपी से नाराज नेताओं को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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कमलेश यादव नामांकन के लिए पूरी तैयारी कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद चुके थे. टिकट कटने के बाद उन्होंने कहा है कि वह पार्टी के छोटे सिपाही हैं और अखिलेश यादव जो आदेश देंगे, उसका पालन करेंगे.
रातों-रात बदल गई पूरी कहानी
गोरखपुर-फैजाबाद सीट से समाजवादी पार्टी ने पहले कमलेश यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था. कमलेश यादव नामांकन का पर्चा भी खरीद चुके थे और शनिवार को बड़े धूम-धड़ाके के साथ अपना नामांकन दाखिल करने वाले थे. लेकिन शुक्रवार की देर शाम अचानक उन्हें संदेश मिला कि उनका नामांकन फिलहाल रोक दिया गया है. इसके बाद उन्हें लखनऊ बुलाया गया ताकि अखिलेश यादव उन्हें मना सकें और उनकी जगह संजय त्रिपाठी को मैदान में उतारा जा सके.
कौन हैं कमलेश यादव?
कमलेश यादव पेशे से शिक्षक हैं. जानकारी के मुताबिक, वह गोरखपुर के सहजनवा स्थित भोलाराम मुस्कुरा इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर काम कर रहे हैं. वह गोरखपुर के खजरी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं और फिलहाल गोरखपुर के बिछिया मोहल्ले में रहते हैं.
कमलेश यादव का परिवार भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है. उनके भतीजे गांव के प्रधान हैं. कमलेश यादव करीब 10 साल से शिक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं.
कमलेश यादव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ वित्तविहीन गुट के प्रदेश सचिव हैं. वह समाजवादी शिक्षक सभा से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा वह समाजवादी पार्टी के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं.
टिकट कटने पर क्या बोले?
टिकट कटने पर कमलेश यादव ने बड़ी समझदारी और पार्टी के प्रति अपनी वफादारी दिखाई है. उन्होंने कहा है कि वह समाजवादी पार्टी के एक छोटे सिपाही हैं और उनके नेता अखिलेश यादव जो भी आदेश देंगे, वह उसका पालन करेंगे. कमलेश ने कहा है कि, 'हमें पीडीए की एक मजबूत सरकार बनानी है. अगर सरकार बनाने के लिए मुझे छोटी सी कुर्बानी देनी पड़े, तो मैं उसके लिए पूरी तरह तैयार हूं.'
2027 से पहले बड़ा सियासी संदेश
सपा के इस फैसले को सिर्फ एमएलसी चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा है. अखिलेश यादव के इस कदम को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
संजयन त्रिपाठी को टिकट देकर सपा ने एक तरफ ब्राह्मणों को संदेश देने की कोशिश की है, वहीं बीजेपी से नाराज नेताओं को भी अपने साथ आने का संकेत दिया है. अखिलेश यादव लगातार कहते रहे हैं कि जो भी लोग सपा में आना चाहते हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं.
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