उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को झटका लगा है. पार्टी से बगावत कर चुके तीन विधायक बुधवार, 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं. इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं.
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राकेश प्रताप सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अमेठी के जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में तीनों विधायक बीजेपी की सदस्यता लेंगे. कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहेंगे.
इन नेताओं की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
बीजेपी के अमेठी जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला के मुताबिक, कार्यक्रम में स्मृति ईरानी और पंकज चौधरी के अलावा राज्य सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान और प्रतिभा शुक्ला भी शामिल होंगे.
क्यों सपा से दूर हुए राकेश प्रताप सिंह?
राकेश प्रताप सिंह की समाजवादी पार्टी से दूरियां राज्यसभा चुनाव के दौरान बढ़ी थीं. उन्होंने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था. इसके बाद सपा ने जून 2025 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. तब से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में किसी दल से जुड़े बिना सदस्य बने हुए थे.
सपा से अपने मतभेदों पर बात करते हुए राकेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि पार्टी में उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया था. उनके मुताबिक, पार्टी में भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए जाते थे और रामचरितमानस को जलाने तथा फाड़ने जैसी घटनाएं हुई थीं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी में देश और समाज से जुड़े मुद्दों के मुकाबले जाति और परिवार के हितों को प्राथमिकता दी जाती है.
राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज में करीब तीन साल पहले एक धार्मिक सभा में दिए गए अपने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि रामचरितमानस और सनातन धर्म को लेकर उनका रुख स्पष्ट रहा है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह विधानसभा की सदस्यता, पार्टी का टिकट या अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटते.
तीनों विधायकों का राजनीतिक सफर
- राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा सीट से लगातार तीन बार, 2012, 2017 और 2022 में विधायक चुने गए. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी उम्मीदवार को 6,963 वोटों से हराया था.
- अभय सिंह पहली बार 2012 में विधायक चुने गए थे. इसके बाद उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की. वह अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं.
- विनोद चतुर्वेदी ने 2007 और 2022 में विधानसभा चुनाव जीता. वह जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक हैं.
तीनों विधायकों के बीजेपी में शामिल होने से पहले उनके सियासी सफर पर नजर डालें तो राकेश प्रताप सिंह का मामला खास तौर पर चर्चा में रहा है. उन्होंने 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था. इसके बाद पार्टी से उनका रिश्ता टूट गया था. अब तीनों विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है.
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