उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट सूबे की सबसे दिलचस्प और वीआईपी सीटों में शुमार रही है. यह वही ऐतिहासिक जमीन है जहां से कभी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया था. लेकिन समय के साथ परिसीमन और जातिगत समीकरणों के जाल में फंसी यह सीट अब एक ऐसे अखाड़े में तब्दील हो चुकी है जहां जीत-हार के लिए हर दल को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिकोहाबाद में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त और मल्लाह-यादव बहुल इस सीट पर चल रही अंदरूनी खींचतान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है.
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मुलायम की कर्मस्थली और शिकोहाबाद का सियासी इतिहास
साल 1993 में समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव इसी सीट से चुनाव जीतकर लखनऊ पहुंचे थे. यह सीट सपा की वैचारिक और राजनीतिक नर्सरी मानी जाती है.
साल 2008 के परिसीमन के बाद यहां के चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव आया. इस सीट पर मुख्य तौर पर यादव, निषाद (मल्लाह) और दलित मतदाता जीत और हार का फैसला तय करते हैं जिसका पलड़ा भारी होता है, बाजी उसी के हाथ लगती है.
वर्तमान विधायक डॉ. मुकेश वर्मा और एंटी-इम्बेंसी का संकट
शिकोहाबाद में पिछले कुछ सालों से मुकाबला मुख्य रूप से ओम प्रकाश वर्मा और डॉ. मुकेश वर्मा के इर्द-गिर्द घूमता रहा है. मौजूदा विधायक डॉ. मुकेश वर्मा पहले बीजेपी से विधायक रहे और बाद में सपा के पाले में आकर वर्तमान में सपा के कोटे से विधायक हैं. इस तरह वह पिछले 10 सालों से इस सीट पर काबिज हैं (5 साल बीजेपी और 5 साल सपा).
लगातार दो बार से विधायक रहने के कारण उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इम्बेंसी (सत्तारूढ़ या मौजूदा जनप्रतिनिधि के प्रति नाराजगी) की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं जिससे पार्टी के भीतर टिकट को लेकर मंथन तेज हो गया है.
समाजवादी पार्टी में टिकट की जंग: कार्डर से लेकर सैफई परिवार तक चर्चा
सपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पार्टी अपने मौजूदा विधायक को ही रिपीट करेगी या किसी नए चेहरे को मैदान में उतारेगी.
प्रमुख दावेदार: सपा से मौजूदा विधायक डॉ. मुकेश वर्मा के अलावा मल्लाह समुदाय से आने वाली महिला और काडर की नेता मीना राजपूत भी टिकट की कतार में हैं.
युवा और यादव चेहरे: छात्र राजनीति से आए आदर्श यादव 'धन्नू' और संजय यादव जैसे युवा चेहरे भी टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं.
सैफई परिवार की एंट्री? राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि क्या समाजवादी पार्टी इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए 'सैफई परिवार' या उनके किसी करीबी रिश्तेदार को मैदान में उतार सकती है.
बीजेपी की घेराबंदी: पुराने चेहरों से लेकर नए समीकरणों पर नजर
विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी शिकोहाबाद सीट को हर हाल में वापस छीनने की फिराक में है.
ओम प्रकाश वर्मा और अन्य नाम: बीजेपी के पाले में पहले विधायक रहे ओम प्रकाश वर्मा मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. हालांकि चुनाव हारने के बावजूद पार्टी उनपर फिर से दांव खेल सकती है.
सवर्ण और अन्य विकल्प: चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अवधेश पाठक जैसे सवर्ण चेहरे को मैदान में उतारने की भी चर्चा है. इसके अलावा सिरसागंज की राजनीति करने वाले हरि ओम यादव के बेटे (विजय प्रताप/छोटू) तथा राम कैलाश यादव और सुनील यादव जैसे कई नाम बीजेपी की लंबी फेहरिस्त में शामिल हैं.
शिकोहाबाद की इस रणभूमि में इस बार निषाद-मल्लाह और यादव मतदाताओं के बीच घमासान तय माना जा रहा है. देखना यह होगा कि सपा अपने दुर्ग को बचाने में कामयाब होती है या बीजेपी सेंध लगाने में सफल रहती है.
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