राज्यसभा चुनाव में सपा नहीं उतारेगी तीसरा प्रत्याशी, अखिलेश यादव बोले- '3 नहीं हमारी निगाह अब 403 पर'

कुमार अभिषेक

• 10:41 AM • 06 Oct 2026

यूपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. अखिलेश यादव ने कहा कि अब पार्टी की नजर 403 विधानसभा सीटों पर है. सपा का फोकस दो प्रत्याशियों की जीत और 2027 चुनाव की तैयारी पर रहेगा.

Akhilesh Yadav

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उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों से राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. विधानसभा में सीटों के समीकरण और वोटों के गणित का बारीकी से आकलन करने के बाद समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में अपना तीसरा उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है. तीसरे प्रत्याशी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर शेयर की. 

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अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट करते हुए लिखा 'अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है.' पार्टी का पूरा फोकस अब अपने दो घोषित प्रत्याशियों की जीत और 2027 के विधानसभा चुनाव पर रहेगा.

नंबर गेम में उलझा तीसरा प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है जहां एक सीट पर जीत के लिए 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है. वर्तमान में यूपी विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है. 

सपा का मौजूदा वोट बैंक: सपा के पास कुल 98 विधायक हैं.  अगर जेल में बंद विधायक रमाकांत यादव को वोटिंग की अनुमति नहीं मिलती है तो यह संख्या 97 रह जाएगी. कांग्रेस के 2 विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास कुल 99 वोट बनते हैं. दो सीटें जीतने के लिए सपा को 74 वोटों की जरूरत है जो उसके पास आसानी से मौजूद हैं.

तीसरी सीट के लिए चाहिए थे 111 वोट

सपा अगर तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारती तो तीनों सीटें जीतने के लिए कुल 111 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती. दो सीटें सुरक्षित करने के बाद सपा के पास करीब 25 अतिरिक्त वोट ही बचते. ऐसे में तीसरी सीट हासिल करने के लिए पार्टी को कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती.

विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर टिकी थीं नजरें

इस आंकड़े को पूरा करने के लिए सपा की नजर तटस्थ और अन्य विपक्षी विधायकों के रुख पर थी. माना जा रहा था कि सुभासपा के सपा पृष्ठभूमि वाले विधायकों, आरएलडी, अपना दल और सपा के कुछ बागी विधायकों के जरिए आंकड़े की भरपाई की जा सकती है. हालांकि, किसी भी राजनीतिक जोखिम या क्रास वोटिंग की आशंका से बचते हुए पार्टी ने कदम पीछे खींचना ही बेहतर समझा.

2027 की 403 सीटों की जंग पर अब सपा का फोकस

राज्यसभा की इस बिसात से हाथ खींचकर सपा ने अपनी रणनीति को फिलहाल दो सीटों तक सीमित कर लिया है. अखिलेश यादव के बयान से स्पष्ट है कि पार्टी राज्यसभा के जोड़-तोड़ में ऊर्जा लगाने के बजाय उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जमीनी मजबूती के साथ उतरने की तैयारी में जुट गई है.
 

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