Shankaracharya News Update: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो मामले ने संतों की दुनिया में उबाल पैदा कर दिया है. जहां एक तरफ पुलिस जांच आगे बढ़ रही है. वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य के बेहद करीबी और मठ की व्यवस्था देखने वाली नीलमणि जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सनातन धर्म पर आघात बताया है. नीलमणि जी ने दावों के साथ कहा है कि जिस मठ पर बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लग रहे हैं. वहां असल में लड़कियां कभी पढ़ती ही नहीं हैं.
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दावों में कितनी सच्चाई?
नीलमणि जी ने एफआईआर में बताए गए आरोपों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि इस मठ में बालिकाओं या युवतियों के रहने का कोई विधान ही नहीं है. उन्होंने बताया कि 'गुरु जी महाराज ने महिलाओं के लिए अलग आश्रम बनाए हैं जो नरसिंहपुर जिले के हीरापुर गांव और साकलघाट में हैं. वहां छोटी बच्चियां पढ़ती हैं और मैं खुद उस आश्रम की प्रभारी हूं. इस मठ से बच्चियों का दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है.'
जिन दो शिष्यों के साथ कुकर्म का आरोप लगाया गया है नीलमणि जी ने उन पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि वे बच्चे कभी मठ के छात्र रहे ही नहीं. उन्होंने कहा 'मठ में प्रवेश करते ही हस्ताक्षर करना अनिवार्य है. हमारे पास 300 बच्चों के रिकॉर्ड हैं. लेकिन उन दो बच्चों का कोई जिक्र तक नहीं है. अगर वे छात्र थे तो उनका रिकॉर्ड कहां है? यह आरोप 100% झूठा है.' शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा मठ को पांच मंजिला शीश महल'और वहां स्विमिंग पूल होने के आरोपों पर नीलमणि जी ने कहा कि बिल्डिंग बड़ी होने में क्या बुराई है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब वहां गलत वातावरण ही नहीं है तो इमारत की ऊंचाई पर सवाल उठाना निराधार है.
नीलमणि जी 1986 से मठ से जुड़ी हैं. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह विवाद हिंदू मानवता पर आघात है. उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भगवान ने पांडवों का साथ दिया था. वैसे ही सत्य की जीत होगी. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो दिनों में पूरे भारत से हजारों लोगों के फोन आए हैं जो शंकराचार्य के समर्थन में खड़े हैं.'
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