Cancelled Trains News: सोनभद्र के रहने वाले छोटेलाल अपने चार साल के बेटे नीरज की आंखों का इलाज कराने के लिए दिल्ली जा रहे थे, लेकिन बनारस रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें रद्द होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गईं. नीरज का पिछले एक साल से दिल्ली के अस्पताल में उपचार चल रहा है. परिवार बच्चे के इलाज की उम्मीद लेकर घर से निकला था, लेकिन ट्रेन नहीं मिलने के कारण अब उन्हें स्टेशन पर 12 से 24 घंटे तक इंतजार करने या वापस लौटने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है. मजदूरी करके परिवार चलाने वाले छोटेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल हो गई है.
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आंखों की बीमारी से जूझ रहा है चार साल का नीरज
छोटेलाल के चार साल के बेटे नीरज की आंखों में गंभीर बीमारी है. उसका पिछले एक साल से अस्पताल में इलाज चल रहा है. परिवार नियमित रूप से इलाज के लिए दिल्ली जाता है, ताकि बच्चे का उपचार जारी रह सके. इस बार भी छोटेलाल अपनी पत्नी और बेटे को लेकर दिल्ली के लिए निकले थे. लेकिन बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि दिल्ली जाने वाली ट्रेनें रद्द हो गई हैं. इससे बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाने की उनकी योजना बिगड़ गई. अब परिवार के सामने यह चिंता है कि इलाज के लिए आगे का सफर कैसे पूरा किया जाए.
सोनभद्र से बनारस आने में खर्च हो गए 500 से 700 रुपये
छोटेलाल मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. उन्होंने बताया कि सोनभद्र से बनारस रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में ही करीब 500 से 700 रुपये खर्च हो जाते हैं. ऐसे में ट्रेन रद्द होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. परिवार के पास सीमित पैसे हैं और बच्चे के इलाज के लिए दिल्ली पहुंचना भी जरूरी है. छोटेलाल के मुताबिक अब उन्हें पत्नी और बीमार बेटे के साथ स्टेशन पर 12 से 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है. अगर स्थिति सामान्य होती है, तो वे दिल्ली जाने की कोशिश करेंगे. अन्यथा उन्हें बच्चे को लेकर वापस सोनभद्र लौटना पड़ेगा.
नीरज की मां ने भी अपनी परेशानी जाहिर की. उन्होंने कहा कि मुश्किलें तो उन्हें ही झेलनी पड़ेंगी. परिवार इतनी दूर से बच्चे को इलाज के लिए लेकर आया है, लेकिन ट्रेन रद्द होने के कारण अब वापस लौटने की नौबत आ गई है. एक तरफ बच्चे की गंभीर बीमारी है और दूसरी तरफ सफर में होने वाला खर्च. ऐसे में स्टेशन पर लंबे समय तक इंतजार करना परिवार के लिए आसान नहीं है. छोटेलाल ने रेलवे से अपील की कि ट्रेनों का परिचालन बंद नहीं होना चाहिए और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए.
CJP के प्रस्तावित आंदोलन से पहले ट्रेनें रद्द होने की खबर
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े आंदोलन का आह्वान किया है. प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देशभर से लोगों के राजधानी पहुंचने की सूचना के बीच कई ट्रेनों के रद्द होने की खबर सामने आई. इसी क्रम में बनारस रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली जाने वाली 12559 शिवगंगा एक्सप्रेस और 12581 सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गईं. इसके चलते इलाज, कामकाज और दूसरे जरूरी कारणों से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
रेलवे ने बताई ट्रेनें रद्द होने की तकनीकी वजह
बनारस रेलवे स्टेशन के डिप्टी एसएस अमित कुमार ने बताया कि रेलवे से मिली सूचना के मुताबिक तकनीकी दिक्कतों के कारण ट्रेनें रद्द की गई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों को टिकट का 100 प्रतिशत रिफंड देने के निर्देश मिले हैं. हालांकि, टिकट के पैसे वापस मिलने से उन लोगों की परेशानी दूर नहीं होती, जिन्हें इलाज या अन्य जरूरी कामों के लिए समय पर दिल्ली पहुंचना है. नीरज का परिवार भी इसी समस्या से जूझ रहा है. छोटेलाल के लिए ट्रेन रद्द होने का मतलब सिर्फ यात्रा में देरी नहीं, बल्कि बेटे के इलाज की योजना पर असर पड़ना भी है.
बेटे के इलाज के लिए अब ट्रेन का इंतजार
छोटेलाल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे को समय पर अस्पताल पहुंचाने की है. परिवार पहले ही सोनभद्र से बनारस आने में पैसे खर्च कर चुका है. अब स्टेशन पर घंटों इंतजार करने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है. अगर ट्रेन का परिचालन सामान्य होता है, तो परिवार दिल्ली जाने की कोशिश करेगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्हें वापस घर लौटना पड़ सकता है. फिलहाल छोटेलाल अपनी पत्नी और बीमार बेटे के साथ स्टेशन पर ट्रेन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं.
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