झांसी में दिवाली से पहले सड़क पर निकलते हैं ‘डाकू’ और खुशी-खुशी लुट जाते हैं लोग, अनोखी है परंपरा

Uttar Pradesh News : बुंदेलखंड के डाकुओं की कहानी पूरी दुनिया में मशहूर रही है. लेकिन बुंदेलखंड के लोग आज भी उन्हें बागी कहकर पुकारते…

Uttar Pradesh News : बुंदेलखंड के डाकुओं की कहानी पूरी दुनिया में मशहूर रही है. लेकिन बुंदेलखंड के लोग आज भी उन्हें बागी कहकर पुकारते हैं. उनको रॉबिनहुड समझते हैं. उनकी याद में एक अनोखी परंपरा भी चलती है. वहीं बुंदेलखंड के कई हिस्सों में आज भी डाकुओं से जुड़ी कहानियां और उनकी याद में निभाई जाने वाली परंपराएं जीवंत हैं.

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‘डाकुओं’ से खुशी-खुशी लुट जाते हैं लोग

झांसी जिले (Jhansi News) के एरच कस्बे में स्थानीय लोग एक अनूठी परंपरा का निर्वाह्न करते हुए डाकुओं की याद में स्वांग रचते हैं. ये लोग समूह में एकजुट होकर डकैतों की तरह कपड़े पहनकर, हाथों में नकली बन्दूक थाम कर सड़क पर गुजरने वाले राहगीरों को रोक लेते हैं और उनसे डकैतों के अंदाज में चंदा मांगते हैं.

दिवाली से पहले सड़क पर निकलते हैं ‘डाकू’

हर साल दीपावली से कुछ दिन पहले इस तरह का स्वांग कर स्थानीय लोग इस परंपरा को निभाते हैं और डाकुओं को याद करते हैं. इस साल भी एरच कस्बे में ये नकली डाकू सड़क पर उतरकर इस तरह लूट करने का स्वांग करते नजर आए. यह लोग डकैतों की तरह कपड़े पहनते और हाथों में नकली बंदूक थामते हैं, जिन्हें दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि यह डकैत हैं. लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है. डकैतों के कपड़े पहनकर और नकली बंदूक थामकर सड़क पर गुजरने वाले राहगीरों को यह लोग रोक लेते हैं. उनसे डकैतों की तरह रुपये मांगते हैं.

डकैतों की याद में चल रही परंपरा

बता दें कि बुंदेलखंड की यह परंपरा यहां हर वर्ष दीपावली से कुछ दिन पहले होती है. कुछ वर्षो के लिए इसे बंद कर दिया गया था. लेकिन 12 सालों बाद फिर इस वर्ष भी पूर्व की तरह यह परम्परा को निभाई गई. इस परम्परा को जो लोग जानते है वह इन नकली डाकुओं को देखकर मुस्कुराते हुए अपनी जेब से रुपए निकालकर चंदे के रूप में देकर निकल जाते हैं और जो नहीं जानता वह कुछ देर के लिए डर भी जाते. जैसे ही उन्हें पता चलता है कि यह स्वांग है तो वह भी इस परंपरा को पूरा करने के लिए चंदा देकर निकल जाते हैं.

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