Asaduddin Owaisi Bahraich UP: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इसी क्रम में एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच जिले की मुस्लिम बहुल मटेरा विधानसभा सीट से अपनी चुनावी रैली का आगाज किया है. लेकिन, ओवैसी की इस एंट्री से मटेरा के स्थानीय मुसलमान और वोटर बिल्कुल भी खुश नहीं हैं. रैली से दूर आम मुसलमानों से जब उनकी राय जानी गई, तो उन्होंने ओवैसी को सिरे से नकारते हुए उन्हें 'बीजेपी की बी-टीम' और सिर्फ 'वोट काटने वाला नेता' करार दिया है. स्थानीय लोगों का स्पष्ट रूप से मानना है कि ओवैसी सिर्फ चुनाव के समय ही यहां मुसलमानों को गुमराह करने आते हैं.
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'ओवैसी से बेहतर बीजेपी को देंगे वोट'
मटेरा के स्थानीय मुसलमानों में ओवैसी को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. नफीस नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा है कि, 'ओवैसी प्यारे की बात नहीं है, हम इससे अच्छा भाजपा को वोट देना पसंद करते हैं.' लोगों का मानना है कि ओवैसी सिर्फ वोट खराब करने और चुनाव के दौरान लोगों को गुमराह करने आते हैं. एक अन्य स्थानीय निवासी ने साफ तौर पर कहा है कि, 'ये बी-टीम है, इनका साठगांठ भाजपा से है, मुसलमान इस बात को समझ रहा है.' वोटरों का कहना है कि चुनाव में केवल सपा और बीजेपी की ही सीधी लड़ाई होती है, तीसरे का यहां कोई मतलब नहीं है.
'एक अकेली मुस्लिम विधायक को हराने आए हैं'
मटेरा विधानसभा सीट 2012 से ही समाजवादी पार्टी का एक मजबूत गढ़ रही है और फिलहाल यहां से मारिया शाह विधायक हैं. स्थानीय लोगों को इस बात की सबसे ज्यादा नाराजगी है कि ओवैसी सिर्फ इसी सीट को क्यों निशाना बना रहे हैं. एक शख्स ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि, 'पूरे मंडल भर में एक मारिया शाह विधायक मुस्लिम है, जिसको हराने के लिए ओवैसी आए हुए हैं.' लोगों ने ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर वह वाकई मुसलमानों के हितैषी हैं, तो जहां बीजेपी का विधायक है, वहां से अपना प्रत्याशी उतारें या फिर मटेरा से किसी हिंदू प्रत्याशी को चुनाव लड़ा कर दिखाएं.
गाजी मियां की मजार पर क्या बोले लोग?
सियासत के साथ-साथ बहराइच स्थित सालार गाजी मियां की मजार और सुहेलदेव का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. इस विवाद पर स्थानीय मुसलमानों ने बहुत ही स्पष्ट राय रखी है. उनका कहना है कि दरगाह पर सभी धर्मों के लोग अपनी अकीदत (श्रद्धा) से जाते हैं. एक बुजुर्ग ने कहा है कि, 'हमसे ज्यादा हिंदू भाई मानते हैं, मुसलमान से ज्यादा हिंदुओं को फायदा मिला है.' स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब केवल वोट बैंक और सियासत की लड़ाई है, जमीन पर गाजी मियां या किसी भी तरह की कोई जात-धर्म की लड़ाई बिल्कुल भी नहीं है.
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