मेरठ कोर्ट में फांसी की सजा सुनते ही मुस्कान और साहिल ने एक दूसरे को देख क्या किया?

यूपी तक

• 08:58 AM • 16 Oct 2026

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया. फैसले के बाद दोनों रो पड़े. जेल में पहली रात, कैदी नंबर और सजा सुनते ही दोनों की प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान खींचा.

Sahil and Muskan

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बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ जिला अदालत ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड दी है. जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वारा 'दंड ही धर्म है' का संदेश देते हुए जैसे ही यह फैसला सुनाया गया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में खड़े दोनों दोषियों के होश उड़ गए. सजा के ऐलान के बाद जहां एक ओर समाज और पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है. वहीं कोर्ट रूम और जेल के भीतर का घटनाक्रम बेहद चौंकाने वाला रहा.

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान लगभग 90% लोगों और खुद दोषियों को यह उम्मीद थी कि बच्चों और अन्य पहलुओं को देखते हुए शायद उम्रकैद की सजा सुनाई जाएगी. लेकिन जब जज ने फांसी का फरमान सुनाया तो मुस्कान के मुंह से अचानक "अरे" निकल गया.

वीसी रूम में मुस्कान और साहिल आरोपी एक-दूसरे से महज 3 फीट की दूरी पर खड़े थे. सजा का ऐलान सुनते ही दोनों के चेहरे के रंग उड़ गए. हालांकि नियमों के तहत उन्हें आपस में बातचीत करने की अनुमति नहीं थी. लेकिन दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखकर आंखों ही आंखों में मानो आखिरी अलविदा कहा और इसके बाद वे फूट-फूटकर रोने लगे. सजा सुनने के बाद मायूस हुई मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों का हवाला देते हुए उनका ख्याल रखने की गुहार भी लगाई.

जज द्वारा पेन फेंकने की परंपरा

फैसला सुनाने के बाद जज द्वारा इस्तेमाल किए गए पेन को फेंकने या उसकी निब तोड़े जाने की भी चर्चा रही. न्यायिक परंपरा के अनुसार, जब भी किसी अदालत द्वारा किसी मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई जाती है तो उस फैसले पर हस्ताक्षर करने वाले पेन की निब तोड़ दी जाती है या उस पेन को नष्ट कर दिया जाता है ताकि उस कलम का इस्तेमाल दोबारा किसी अन्य फैसले के लिए न हो सके.

जेल में बीती पहली रात और कैदी नंबर

सजा के बाद साहिल को कैदी नंबर 395 देकर सजायाफ्ता बैरक नंबर 15 में भेजा गया है. जबकि मुस्कान को कैदी नंबर 396 के साथ बैरक नंबर 12 (बी) में रखा गया है, जहां वह अपनी छोटी बेटी के साथ रह रही है.

फांसी की सजा के मानसिक सदमे के कारण दोनों ने रात का खाना लगभग छोड़ दिया. अगली सुबह जेल प्रशासन द्वारा उनकी सख्त निगरानी बढ़ाई गई और डॉक्टरों की टीम लगाकर उनकी नियमित काउंसलिंग व मेडिकल चेकअप शुरू किया गया है.

क्या है मामला

मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की 3 मार्च 2025 को बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. हत्या के बाद शव के कई टुकड़े कर उन्हें सीमेंट के साथ एक नीले ड्रम में सील कर दिया गया था. इस जघन्य हत्याकांड के खुलासे के बाद से ही यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ था, जिस पर अब अदालत ने दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है.

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