नीले ड्रम केस में सजा पर फैसला आने से पहले मुस्कान ने कोर्ट में क्या कहा, मेरठ सौरभ हत्याकांड में सजा पर क्या हुई बहस?

यूपी तक

• 02:08 PM • 14 Oct 2026

मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान रस्तोगी ने अदालत के सामने अपने बच्चों का जिक्र किया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान जब उससे पूछा गया कि उसे कुछ कहना है, तो उसने कहा कि उसके दो बच्चे हैं और उनकी देखभाल की जाए. वहीं, साहिल ने अदालत में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

मुस्कान-सौरभ-साहिल

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Meerut Blue Drum Case: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान रस्तोगी ने अदालत के सामने अपने बच्चों का जिक्र किया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान जब उससे पूछा गया कि उसे कुछ कहना है, तो उसने कहा कि उसके दो बच्चे हैं और उनकी देखभाल की जाए. वहीं, साहिल ने अदालत में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. इसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों ने सजा के बिंदु पर अपनी-अपनी दलीलें रखीं. सौरभ राजपूत के परिवार की ओर से दोषियों को फांसी देने की मांग की गई, जबकि बचाव पक्ष ने कम से कम सजा देने की अपील की. अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं.

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मुस्कान ने कोर्ट में बच्चों को लेकर क्या कहा?

सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान मुस्कान रस्तोगी और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया. सौरभ के परिवार के वकील विजय बहादुर के मुताबिक, अदालत ने पहले साहिल से पूछा कि उसे कुछ कहना है या नहीं. साहिल ने जवाब दिया कि उसे कुछ नहीं कहना है. इसके बाद मुस्कान से भी उसकी बात रखने के लिए पूछा गया. मुस्कान ने कहा कि उसके दो बच्चे हैं और उनकी देखभाल की जाए. इस बयान के बाद अदालत में सजा के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं.

वकील ने क्यों मांगी फांसी की सजा?

सौरभ राजपूत के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील विजय बहादुर ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की. उन्होंने दलील दी कि हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई और वारदात के बाद शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में डाल दिए गए. वकील के मुताबिक, अपराध की गंभीरता और उसके तरीके को देखते हुए दोषियों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अधिकतम सजा दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध बताते हुए मृत्युदंड की मांग की.

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बचाव पक्ष ने क्यों की कम सजा देने की अपील?

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों के लिए न्यूनतम सजा देने की मांग की. सौरभ के परिवार के वकील के मुताबिक बचाव पक्ष ने अदालत के सामने तर्क दिया कि दोनों का इससे पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है और जेल में उनका आचरण भी सही रहा है. इन्हीं पहलुओं के आधार पर कम सजा देने की अपील की गई. वहीं, मुस्कान की ओर से बच्चों की देखभाल का मुद्दा भी सामने आया. अब अदालत को अपराध की गंभीरता और बचाव पक्ष की दलीलों सहित सभी पहलुओं पर विचार करना है.

हत्या से पहले और बाद की प्लानिंग का भी जिक्र

सौरभ के परिवार के वकील विजय बहादुर ने सुनवाई के दौरान हत्या से पहले और बाद में की गई  तैयारियों का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि वारदात योजनाबद्ध तरीके से की गई थी. वकील के मुताबिक सौरभ को बेहोश करने के लिए इंजेक्शन और वारदात में इस्तेमाल करने के लिए चाकू खरीदा गया था. हत्या के बाद शव के टुकड़ों को रखने के लिए नीला ड्रम खरीदे जाने और रेत-सीमेंट का इस्तेमाल किए जाने की बात भी उन्होंने अदालत के सामने रखी. उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों से अपराध की गंभीरता का पता चलता है. इन्हीं दलीलों के आधार पर उन्होंने अधिकतम सजा देने की मांग की.

लंच के बाद फैसले की उम्मीद

सौरभ के परिवार के वकील विजय बहादुर के मुताबिक अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को शांतिपूर्वक सुना. दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद लंच के बाद फैसला आने की उम्मीद जताई गई. हालांकि, अंतिम निर्णय अदालत के आदेश से ही स्पष्ट होगा. इस मामले में एक ओर सौरभ के परिवार ने अधिकतम सजा की मांग की है, तो दूसरी ओर बचाव पक्ष ने कम सजा देने की अपील की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत मुस्कान और साहिल के लिए क्या सजा तय करती है.