प्रेमानंद महाराज के आश्रम और उससे जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने विराट कोहली को लेकर नई बता बताई है. उनका कहना है कि जब प्रेमानंद महाराज एक साधारण संत थे, तब महाराष्ट्र की एक पीआर कंपनी और राजस्थान के एक प्रॉपर्टी ग्रुप ने उन्हें दुनियाभर में लोकप्रिय बनाने की योजना बनाई थी. इसी के तहत विराट कोहली को करीब 5 करोड़ रुपये में महाराज के पास लाया गया था.
ADVERTISEMENT
दिनेश फलाहारी के मुताबिक, इस ग्रुप में करीब 40 लोग शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि ग्रुप ने प्रेमानंद महाराज से कहा था कि उनके प्रवचन और संदेश लोगों को पसंद आते हैं और उन्हें दुनिया भर में लोकप्रिय बनाया जा सकता है. महाराज ने कथित तौर पर सिर्फ इतना कहा था कि उनकी भजन-साधना में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. इसके बाद विराट कोहली को महाराज से मिलवाया गया.
'विराट कोहली के आने के बाद बढ़ी लोकप्रियता'
फलाहारी का दावा है कि विराट कोहली के पहली बार दर्शन के लिए आने के बाद प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. उनके मुताबिक, इसके बाद देश-विदेश से लोग महाराज के प्रवचन सुनने लगे और नेता, अभिनेता समेत कई बड़े लोग भी उनसे मिलने आने लगे.
उन्होंने दावा किया कि विराट कोहली को पहली बार लाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. उनके मुताबिक, इसमें 2 करोड़ रुपये एक जगह और 3 करोड़ रुपये दिल्ली स्थित आवास में दिए गए थे. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
प्रॉपर्टी ग्रुप पर जमीन कब्जाने का आरोप
दिनेश फलाहारी ने इसी ग्रुप पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं. उनका दावा है कि प्रेमानंद महाराज के नाम और लोकप्रियता का इस्तेमाल करते हुए ग्रुप ने यमुना खादर की जमीन और सरकारी जमीन पर कब्जा किया और वहां निर्माण कराया. उन्होंने कहा कि महाराज ने इस तरह के कामों का विरोध किया और ग्रुप के लोगों को फटकार भी लगाई थी.
फलाहारी के मुताबिक, बाद में इस विवाद के कारण प्रेमानंद महाराज बेलवन आश्रम चले गए. उन्होंने दावा किया कि इसके बाद आश्रम से जुड़े लोगों के बीच दो गुट बन गए. एक तरफ महाराज के साथ गए साधु हैं और दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिन्हें फलाहारी ने 'नकली संत' और 'भू-माफिया टाइप' बताया.
'विराट ने पैसे वापस कर दिए थे'
विराट कोहली को लेकर फलाहारी ने एक और दावा किया. उन्होंने कहा कि पहली बार आने पर विराट कोहली ने पैसे लिए थे, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि उनसे गलती हुई है. फलाहारी के मुताबिक, दूसरी बार आने पर विराट ने महाराज को कई गुना रकम वापस कर दी.
उन्होंने दावा किया कि आज भी प्रेमानंद महाराज के यहां रहने वाले साधकों के भोजन की व्यवस्था विराट कोहली की तरफ से होती है. फलाहारी ने विराट कोहली को 'अच्छा व्यक्ति' बताते हुए कहा कि अब वह राधा रानी के भक्त हैं और उनकी पत्नी भी राधा रानी की भक्त हो चुकी हैं.
विराट कोहली को छोड़कर दूसरे बड़े लोगों से किसी तरह का पैसा नहीं लिया गया. उनके मुताबिक, विराट कोहली को पहली बार केवल प्रचार और लोकप्रियता बढ़ाने के मकसद से लाया गया था. इसके बाद दूसरे नेता और हस्तियां खुद महाराज के पास आने लगे.
14-15 आश्रमों पर कब्जे का भी दावा
फलाहारी ने दावा किया कि प्रेमानंद महाराज से जुड़े करीब 14-15 आश्रमों पर दूसरे गुट के लोगों ने कब्जा कर लिया है. उनका कहना है कि इन जगहों के दस्तावेज दूसरे लोगों के नाम पर होने के कारण महाराज के लिए कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल है. उन्होंने दावा किया कि ग्रुप ने करीब 5 करोड़ रुपये लगाए और बाद में करीब 500 करोड़ रुपये कमाए.
CBI जांच की मांग
जमीन और पैसों से जुड़े आरोपों पर दिनेश फलाहारी ने पूरे मामले की सीबीआई या किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों के बैंक खातों और बैंक स्टेटमेंट की जांच होनी चाहिए. फलाहारी ने कहा कि अगर उनके बयान में झूठ साबित होता है तो वह सजा भुगतने के लिए तैयार हैं. उन्होंने दावा किया कि वह जांच एजेंसी के सामने अपना बयान देने के लिए भी तैयार हैं.
क्या है पूरा विवाद?
प्रेमानंद महाराज वृंदावन के चर्चित संत हैं और बड़ी संख्या में लोग उनके प्रवचन सुनते हैं. हाल के दिनों में उनके आश्रम से जुड़े विवाद ने तब ज्यादा ध्यान खींचा, जब उनके एक शिष्य दीपक लोढ़ी की मौत के बाद कई तरह के दावे और आरोप सामने आए. इसके बाद आश्रम की व्यवस्था, वहां रहने वाले साधुओं और जमीन से जुड़े सवाल भी चर्चा में आए.
ये भी पढ़ें - प्रेमानंद महाराज के समर्थन में आए क्रिकेटर विराट कोहली, फलाहारी बाबा के इन आरोपों का किया खंडन
ADVERTISEMENT











