शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद वृंदावन में केली कुंज आश्रम पहुंचे प्रेमानंद महाराज, कितनी देर रुके और क्या-क्या किया यहां?

मदन गोपाल

• 08:53 AM • 09 Oct 2026

प्रेमानंद महाराज को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है. शिष्य रसिक दुलारी शरण के निधन के बाद महाराज के आश्रम छोड़ने और बंटवारे की खबरें फैली थीं. शुक्रवार सुबह छह बजे उन्होंने भक्तों को दर्शन दिए.

Screengrab from video:तस्वीर AI से मॉडिफाई की गई है

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वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही तरह-तरह की अफवाहों और कयासों पर आखिरकार विराम लग गया है. उनके शिष्य दीपक लोधी उर्फ 'रसिक दुलारी शरण' के निधन के बाद से सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि महाराज जी हमेशा के लिए राधा केलि कुंज छोड़कर एकांतवास में चले गए हैं और आश्रमों में बंटवारा हो गया है. लेकिन सुबह करीब 6:00 बजे पूज्य महाराज जी खुद राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए. लगभग 2 घंटे तक आश्रम में रुककर दर्शन देने से भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई. वहीं भ्रामक खबरें फैलाने वालों के दावों की हवा निकल गई.

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सुबह 6 बजे केलि कुंज आश्रम पहुंचे प्रेमानंद महाराज

पिछले काफी दिनों से देश-विदेश से आए श्रद्धालु रोजाना तड़के ही राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर कतारों में खड़े होकर पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन का घंटों इंतजार करते थे. जब सुबह 6:00 बजे अचानक महाराज जी आश्रम पहुंचे तो श्रद्धालुओं के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था. 

'संत महिमा' फेसबुक पेज पर आधिकारिक प्रेस नोट जारी

इस पूरे घटनाक्रम के बाद 'केलि कुंज' के आधिकारिक फेसबुक पेज 'संत महिमा' पर एक प्रेस नोट भी जारी किया गया. इसमें साफ रूप से कहा गया कि पूज्य महाराज जी आज केलि कुंज आश्रम पधारे हैं. यह उन लोगों के लिए सीधा जवाब है जो पिछले कई दिनों से भ्रामक और झूठी खबरें फैला रहे थे कि महाराज जी आश्रम छोड़ चुके हैं या दोनों आश्रम अलग-अलग हो गए हैं.

शिष्य के निधन के बाद फैलाई जा रही थीं भ्रामक खबरें

दरअसल, प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण की मौत 25 सितंबर को हुई थी. बताया गया है कि उन्होंने गुरु कृपा कुंज की छत से कूद कर जान दे दी.
रसिक दुलारी शरण की अचानक हुई मृत्यु के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई तरह की मनगढ़ंत कहानियां उड़ाई जा रही थीं. दावा किया जा रहा था कि इस घटना के बाद महाराज जी ने केलि कुंज से दूरी बना ली है और एकांतवास में चले गए हैं. लेकिन शुक्रवार को महाराज जी की उपस्थिति ने इन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया.

'पूरा परिकर एक है, कोई अलग नहीं'-आश्रम का संदेश

आश्रम की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि पूज्य प्रेमानंद जी महाराज और उनके परिकर (अनुयायियों व सेवादारों) के सभी लोग पूरी तरह एकजुट हैं. कोई भी अलग-अलग नहीं हुआ है और न ही आश्रमों में कोई बंटवारा हुआ है. महाराज जी के दर्शन के बाद अफवाहों का बाजार पूरी तरह शांत हो गया है और केलि कुंज में एक बार फिर भक्ति व उल्लास का माहौल लौट आया है.