Sambhal CO Kuldeep Kumar: संभल के सीओ कुलदीप कुमार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मुख्यमंत्री वीरता पदक' से सम्मानित किया है. लखनऊ के लोकभवन में आयोजित एक विशेष अलंकरण समारोह में सीएम योगी ने सीओ कुलदीप कुमार को उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए मेडल पहनाकर सम्मानित किया है.
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जानकारी के लिए बता दें, संभल के सीओ को यह बड़ा सम्मान 2019 में बरेली में हुई 15 लाख रुपये से ज्यादा की लूट के मामले में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ और साहसिक कार्रवाई के लिए दिया गया है. इस वीरता पदक की घोषणा 26 जनवरी 2025 को ही कर दी गई थी.
सीओ कुलदीप कुमार वही पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने संभल हिंसा मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली से लंबी पूछताछ की थी और बाद में 1200 से अधिक पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की थी.
बरेली एनकाउंटर के लिए मिला सम्मान
लखनऊ के लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने आईपीएस अधिकारियों से लेकर कांस्टेबल रैंक के सिपाहियों को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया था, जिसमें संभल के सीओ सदर कुलदीप कुमार भी शामिल थे. साल 2019 में बरेली में बदमाशों ने एक ज्वेलर के कर्मचारी को गोली मारकर 15 लाख रुपये लूट लिए थे. इसके बाद कुलदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस की बदमाशों के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें दो बदमाश मारे गए थे. इस एनकाउंटर के दौरान एक गोली कुलदीप कुमार की जैकेट में भी लगी थी और दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे. इसी बहादुरी के लिए उन्हें यह सम्मान मिला है.
संभल हिंसा के आरोपियों पर एक्शन
संभल में भारी हिंसा के बाद सीओ कुलदीप कुमार को संभल जिले में तैनात किया गया था. इसके बाद उन्हें हिंसा की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी (SIT) में शामिल किया गया था. कुलदीप कुमार के नेतृत्व में ही एसआईटी ने संभल हिंसा से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ की. इसी मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, जामा मस्जिद के सदर जफर अली और सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल से थाने में कई घंटों तक पूछताछ की गई थी. इसके बाद सदर जफर अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का नाम हिंसा से जुड़ी 1200 पन्नों वाली चार्जशीट में शामिल किया गया था.
कौन हैं सीओ कुलदीप कुमार?
संभल में तैनात सीओ सदर कुलदीप कुमार मूल रूप से मेरठ जिले के हस्तिनापुर विधानसभा के बेहसुमा गांव के रहने वाले हैं. वह साल 2001 में स्पोर्ट्स कोटे के जरिए उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) के पद पर भर्ती हुए थे. अपनी मेहनत से वह आउट-ऑफ-टर्म प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने. साल 2016 में उन्हें प्रमोशन देकर डिप्टी एसपी (सीओ) बना दिया गया. डिप्टी एसपी के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग बरेली में हुई थी, जहां वह करीब ढाई साल (2 साल 4 महीने) तक रहे. यूपी पुलिस में कुलदीप कुमार को एक बेहद सख्त और कड़क अधिकारी माना जाता है.
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