UPSTF Extortion Racket News: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ यूपी एसटीएफ (UPSTF) को एक और बड़ी कामयाबी मिली है. एसटीएफ ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी के भाई-भतीजों द्वारा संचालित किए जा रहे एक बड़े अवैध वसूली सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह आरटीओ (RTO) के फर्जी अधिकारी बनकर वाराणसी, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे कई जिलों में हाईवे पर ट्रकों से जबरन वसूली कर रहा था. पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है.
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आरटीओ का सिपाही ही निकला मास्टरमाइंड
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे अवैध नेटवर्क को खड़ा करने वाला मुख्य आरोपी विपिन यादव खुद गाजीपुर जिले के आरटीओ दफ्तर में बतौर सिपाही तैनात है. सरकारी नौकरी में होने के बावजूद विपिन ने डरा-धमकाकर ट्रकों से मोटी रकम ऐंठने का यह पूरा जाल बुना था. सिपाही विपिन यादव ने इस काम को पूरी तरह असली रूप देने के लिए अपने साथियों को आरटीओ विभाग के 'एनफोर्समेंट सुपरवाइजर' के फर्जी पहचान पत्र (आई कार्ड) भी बनाकर दे रखे थे, ताकि हाईवे पर चेकिंग के दौरान किसी को भी उन पर शक न हो.
एंट्री फीस के नाम पर हर ट्रक से ₹3000 की लूट
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से हाईवे से गुजरने वाले ओवरलोडेड ट्रक होते थे. गिरोह के सदस्य फर्जी एनफोर्समेंट सुपरवाइजर बनकर ट्रक ड्राइवरों को रोकते थे और उन पर भारी-भरकम कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का रौब झाड़ते थे. इसके बाद डरे हुए ड्राइवरों से गाड़ी को बिना किसी परेशानी के आगे पास कराने यानी 'एंट्री फीस' के नाम पर हर एक ट्रक से ₹3000 की जबरन वसूली की जाती थी.
पूर्व मंत्री के भाई-भतीजे समेत 19 लोगों पर FIR
इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश होने के बाद कानून का शिकंजा कस गया है. एसटीएफ इंस्पेक्टर शिव नेत्र सिंह की शिकायत पर वाराणसी के फूलपुर थाने में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस एफआईआर में पूर्व कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी के भाई, उनके भतीजे विपिन यादव, नाती आकाश चौधरी और एक अन्य रिश्तेदार राजा समेत कुल 19 लोगों को नामजद किया गया है.
फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस और यूपी एसटीएफ इस मामले को लेकर काफी एक्टिव हैं. चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब इस गिरोह से जुड़े अन्य फरार सदस्यों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग टीमें छापेमारी कर रही हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और इस अवैध वसूली रैकेट में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. जल्द ही इस सिंडिकेट से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है.
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