Vineet Minocha Murder Case: कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है. जिस बहू शालू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर 16 दिन जेल में रखा गया, अब पुलिस उसे इस मामले में बेगुनाह बता रही है. पुलिस के मुताबिक विनीत मिनोचा की हत्या की साजिश उनके बेटे सुब्रत मिनोचा ने अपने पुराने नौकर विशाल और राजकिशोर के साथ मिलकर रची थी. पुलिस के अनुसार हत्या को पहले तकिये से मुंह दबाकर अंजाम देने की योजना थी, ताकि इसे प्राकृतिक मौत जैसा दिखाया जा सके. लेकिन घर के अंदर हलचल होने और विनीत मिनोचा के शोर मचाने के बाद पूरी योजना बदल गई और चाकू से हमला किया गया. इस पूरे मामले में पुलिस की शुरुआती जांच भी सवालों के घेरे में आ गई है.
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शालू की गिरफ्तारी के बाद बदली पूरी कहानी
5 सितंबर की रात विनीत मिनोचा की उनके ही घर में हत्या हुई थी. इसके करीब 72 घंटे के भीतर पुलिस ने उनकी बहू शालू को गिरफ्तार कर लिया था. उस समय पुलिस की ओर से बताया गया कि शालू पर हत्या में शामिल होने का आरोप है. पुलिस हिरासत में मौजूद सुपारी किलर विशाल ने भी मीडिया के कैमरे पर कहा था कि उसे हत्या के लिए उसकी भाभी शालू ने कहा था. इसी बयान के आधार पर उस समय पुलिस की जांच शालू की ओर बढ़ी. शालू को अन्य आरोपियों के साथ जेल भेज दिया गया और वह 16 दिन तक जेल में रही. अब पुलिस का कहना है कि शालू इस साजिश का हिस्सा नहीं थी और उसे फंसाया गया था.
पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा?
मामले की जांच में आए बदलाव के बाद कानपुर के पुलिस कमिश्नर ने शुरुआती कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा. उनके मुताबिक उस समय उन्हें ऐसा लगा था कि उपलब्ध सबूत शालू की ओर इशारा कर रहे हैं. विशाल के बयान और उस समय सामने आए तथ्यों के आधार पर शालू को गिरफ्तार किया गया. पुलिस कमिश्नर के मुताबिक उस समय जांच में मिले सबूत ऐसे दिखाई दे रहे थे, इसलिए विशाल और राजकिशोर के साथ शालू को भी आरोपी मानकर कार्रवाई की गई. बाद में जांच आगे बढ़ी तो तस्वीर बदलती गई और पुलिस अब सुब्रत को इस मामले की साजिश से जोड़ रही है.
16 दिन जेल में रही शालू
शालू की गिरफ्तारी के बाद इस मामले को लेकर लगातार चर्चा होती रही. एक महिला, पत्नी, बहू और मां होने के बावजूद शालू को हत्या के आरोप में जेल जाना पड़ा. शुरुआती पुलिस कार्रवाई के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में भी उसके खिलाफ बातें सामने आईं. उसे आरोपी के तौर पर देखा गया और गिरफ्तारी के बाद उसे दुपट्टे से अपना चेहरा छिपाते हुए भी देखा गया. अब पुलिस की जांच में उसके खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने की बात सामने नहीं आ रही है. यानी जिस महिला को 16 दिन तक जेल में रखा गया, उसी मामले में अब पुलिस उसे बेगुनाह बता रही है. इस बदलाव ने शुरुआती जांच और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सुब्रत से पूछताछ में क्यों हुई इतनी देर?
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि शालू को हत्या के 72 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन सुब्रत से पुलिस ने शुरुआत में उसी तरह पूछताछ क्यों नहीं की. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हत्या के आठ दिन बाद तक पुलिस ने सुब्रत से पूछताछ नहीं की थी. शुरुआती जांच में कॉल डिटेल और घर में एंट्री के लिए गेट पर गार्ड को दी गई अनुमति जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया. लेकिन अब पुलिस के मुताबिक मामले की साजिश का केंद्र सुब्रत था. ऐसे में जांच की शुरुआती दिशा और बाद में सामने आई कहानी के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है.
24 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आया सुब्रत
24 सितंबर की दोपहर कानपुर में पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान पुलिस अफसरों के पीछे एक आरोपी खड़ा था और वह सुब्रत था. आधे घंटे से ज्यादा चली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने विनीत मिनोचा हत्याकांड की साजिश के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसी दौरान पुलिस ने सुब्रत की पुलिस कस्टडी में रिकॉर्ड की गई बातों को भी मीडिया के सामने रखा. सुब्रत पुलिस अधिकारियों के पीछे खड़ा रहा और पुलिस कमिश्नर लगातार उसके बारे में मामले की जानकारी देते रहे. इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हत्या की साजिश से जुड़ी कई बातें सामने आईं.
सुब्रत ने बताई थी कहानी
पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर की देर रात करीब ढाई बजे पूछताछ के बाद जब सुब्रत को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दी गई, तब उसने अपने पिता की हत्या से जुड़ी कहानी बताई. उसका बयान पुलिस ने रिकॉर्ड किया था और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी इसे सामने रखा गया. पुलिस के अनुसार सुब्रत ने हत्या की वजह, साजिश और उसमें शामिल लोगों के बारे में जानकारी दी. इसी बयान में उसने यह भी कहा कि उसकी पत्नी शालू को इस साजिश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. पुलिस के मुताबिक सुब्रत के बयान के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई.
तकिये से हत्या की थी योजना
पुलिस के अनुसार सुब्रत ने अपने पिता की हत्या के लिए पहले ऐसी योजना बनाई थी जिसमें तकिये से उनका मुंह दबाकर उनकी जान लेने की बात थी. मकसद यह था कि मौत सामान्य या प्राकृतिक लगे और किसी को हत्या का शक न हो. इसके लिए विशाल और राजकिशोर को घर के अंदर भेजा गया था. लेकिन विनीत मिनोचा ने दोनों को घर के अंदर देख लिया. इसके बाद उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया. अचानक पैदा हुई इस स्थिति से दोनों घबरा गए और तकिये से हत्या करने की योजना पर अमल नहीं हो सका. पुलिस के मुताबिक इसके बाद दोनों ने चाकू से विनीत मिनोचा पर हमला कर दिया. इसी के साथ पूरी साजिश हत्या के मामले में बदल गई.
40 लाख का कर्ज और संपत्ति का डर
पुलिस के सामने दिए गए बयान के मुताबिक, सुब्रत ने अपने पिता की हत्या की योजना के पीछे कई वजहें बताईं. उसने कहा कि उसे अपने खर्च के लिए हर महीने 40 हजार रुपये मिलते थे, जबकि उसके ऊपर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज था. इसके अलावा उसके मन में यह डर भी था कि कहीं उसके पिता किसी दिन किसी महिला को घर न ले आएं और अपनी पूरी संपत्ति उसके नाम न कर दें. सुब्रत ने अपने पिता पर कई महिलाओं के साथ संबंध होने का आरोप भी लगाया. पुलिस के मुताबिक, इन्हीं बातों को लेकर उसके मन में पिता के खिलाफ नाराजगी और संपत्ति को लेकर डर बढ़ता गया.
चार-पांच महीने से रची जा रही थी साजिश
पुलिस के अनुसार, विनीत मिनोचा की हत्या का प्लान अचानक नहीं बनाया गया था. सुब्रत पिछले चार-पांच महीनों से अपने पिता को मारने की साजिश रच रहा था. इस दौरान उसने अपने पुराने नौकर विशाल और राजकिशोर को भी इस योजना में शामिल किया. पहले हत्या को प्राकृतिक मौत जैसा दिखाने के लिए तकिये से मुंह दबाने का प्लान बनाया गया. लेकिन मौके पर हालात बदल गए और चाकू से हमला करना पड़ा. पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद सुब्रत को यह अंदाजा था कि मामला पुलिस तक पहुंचेगा और इसके बाद उसने खुद को बचाने के लिए कहानी को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की.
पहले चाचा को फंसाने का बनाया था प्लान
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद सुब्रत ने सबसे पहले अपने चाचा को इस मामले में फंसाने के बारे में सोचा था. लेकिन गिरफ्तारी के बाद विशाल ने चाचा की जगह शालू का नाम ले लिया. यह बात खुद सुब्रत के लिए भी हैरान करने वाली थी. इसके बाद उसने सोचा कि अगर शालू हत्या के मामले में फंस जाती है तो वह खुद बच सकता है. इसी वजह से पुलिस पूछताछ के शुरुआती दौर में सुब्रत भी शालू का नाम लेता रहा. इस तरह पुलिस की शुरुआती जांच शालू की ओर चली गई और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. अब जांच में पुलिस का कहना है कि शालू को जानबूझकर इस मामले में फंसाया गया था.
शालू को साजिश की जानकारी नहीं थी
सुब्रत के पुलिस के सामने दिए गए बयान के मुताबिक, उसकी पत्नी शालू को पिता की हत्या की योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उसने यह साजिश उससे छिपाकर रखी थी. यानी चार-पांच महीने से पिता की हत्या की योजना बनाए जाने के बावजूद शालू को इसमें शामिल नहीं किया गया. पुलिस अब इसी आधार पर शालू को मामले में बेगुनाह मान रही है. शुरुआती जांच में जिस महिला को हत्या का आरोपी बनाया गया था, अब उसी मामले में पुलिस का कहना है कि वह साजिश का हिस्सा नहीं थी. यही इस केस का सबसे बड़ा जांच मोड़ बनकर सामने आया है.
सुब्रत को शालू को फंसाने का मलाल
पुलिस के मुताबिक सुब्रत ने पूछताछ के दौरान कहा कि उसे अपनी पत्नी शालू को फंसाने का मलाल है. हालांकि, उसके बयान के अनुसार उसे अपने पिता की मौत का मलाल नहीं है. उसने इतना जरूर कहा कि वह नहीं चाहता था कि उसके पिता की हत्या चाकू से हो. उसकी योजना कुछ और थी, लेकिन घटनास्थल पर हालात बिगड़ने के बाद विशाल और राजकिशोर ने चाकू से हमला कर दिया. इस तरह हत्या जिस तरीके से करने की योजना बनाई गई थी, उससे बिल्कुल अलग तरीके से हुई. पुलिस के मुताबिक, यही वजह थी कि वारदात के बाद मामले को छिपाना मुश्किल हो गया.
हत्या के बाद सो नहीं पा रहा था सुब्रत
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद सुब्रत की मानसिक स्थिति को लेकर भी उसके बयान में एक बात सामने आई. पुलिस के मुताबिक, उसने बताया कि हत्या के बाद से वह ठीक से सो नहीं पा रहा था. शालू के जेल जाने और खुद के बच निकलने की कोशिश के बीच उसके मन में यह बात भी चल रही थी कि उसने अपनी पत्नी को फंसा दिया है. इसी मलाल के चलते उसने नींद की गोलियां खाकर अपनी जान देने के बारे में भी सोच रखा था. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह उसका बताया हुआ विचार था. पुलिस की जांच में अब पूरे घटनाक्रम को उसके बयान, अन्य आरोपियों की भूमिका और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर देखा जा रहा है.
पुलिस की शुरुआती जांच पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में अब हत्या की साजिश के साथ-साथ पुलिस की शुरुआती जांच भी चर्चा में है. जिस केस में 72 घंटे के भीतर शालू को गिरफ्तार कर लिया गया था, उसी केस में बाद की जांच ने कहानी को पूरी तरह बदल दिया. पुलिस अब कह रही है कि शालू बेगुनाह है और सुब्रत ने विशाल तथा राजकिशोर के साथ मिलकर अपने पिता की हत्या की साजिश रची थी. 24 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने सुब्रत के बयान को भी सामने रखा. इस बयान में हत्या की वजह से लेकर तकिये से मुंह दबाकर हत्या करने की योजना, चाकू से हमला, शालू को फंसाने और बाद में उसे लेकर हुए मलाल तक की बातें सामने आईं. फिलहाल इस हत्याकांड की कहानी में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि जिस शालू को 16 दिन तक आरोपी बनाकर जेल में रखा गया, अब पुलिस उसे इस साजिश से अलग बता रही है.
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