Administrative negligence in Gorakhpur: निर्माणाधीन सड़क, नाले के साथ-साथ खुले मेनहोल में गिरने से मौत की खबरें बीते कुछ दिनों से लगातार सामने आ रही हैं. इस बीच यूपी के गोरखपुर से भी एक ऐसी ही खबर सामने आई है जहां 12 साल के एक मासूम बच्चे कन्हैया की नाले में गिरकर मौत हो गई. इस खबर के सामने आते ही सिस्टम की एक और बड़ी लापरवाही सामने आ गई. बता दें जिस नाले में गिरने से बच्चे की मौत हुई उसका ढक्कन खुला हुआ था. अधिकारियों का कहना है कि नाले का स्लैब हट जाने की वजह से यह हादसा हुआ. लेकिन यह स्लैब हटा कैसे और ठेकेदार ने वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है. फिलहाल 12 साल के मासूम बच्चे की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.
ADVERTISEMENT
पापा मुझे भी साइकिल दिला दो न...
चिलुआताल थाना क्षेत्र के मुड़ीला उर्फ मुंडेरा के रहने वाले श्याम सुंदर चौरसिया के तीन बेटों में 12 साल का कन्हैया सबसे बड़ा था. श्याम सुंदर चौरसिया सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालते हैं. पिता श्याम सुंदर ने बताया कि कन्हैया को साइकिल चलाने का बहुत शौक था. वह दूसरे बच्चों से साइकिल मांगता था. लेकिन लोग उसे डांटकर भगा देते थे. इसके बाद उन्होंने बेटे को साइकिल गिफ्ट करने का मन बनाया. श्याम सुंदर ने कुछ पैसे जुटाकर 2600 रुपये की साइकिल अपने बेटे को गिफ्ट किया. इस दौरान उसकी आंखों में एक ऐसी चमक थी जो पहले कभी नहीं दिखी थी. लेकिन किसे पता था कि यह खुशी महज 4 दिन की मेहमान है.
दोस्तों के साथ साइकिल से घूमकर घर लौट रहा था कन्हैया
18 फरवरी की शाम कन्हैया उसी नई साइकिल को लेकर दोस्तों के साथ घर लौट रहा था. राप्ती नगर विस्तार कॉलोनी के पास अचानक उसकी साइकिल अनियंत्रित हुई और वह निर्माणाधीन नाले (केबल ट्रंच) में जा गिरा. नाले का ढक्कन खुला था और उसमें से नुकीले लोहे के सरिये बाहर की ओर झांक रहे थे. एक काल बनकर खड़ा सरिया मासूम के पेट में जा धंसा. वह घंटों वहां फंसा रहा, चीखता रहा. जब तक लोग उसे बाहर निकालते कन्हैया के शरीर से बहुत खून बह चुका था.
1.30 घंटे तक तड़पता रहा कन्हैया
सड़क पर पड़े अपने बेटे को तड़पते देख पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई. अस्पताल ले जाते समय कन्हैया सिर्फ दर्द से कराह रहा था और पिता उसे सब ठीक हो जाएगा का दिलासा देते रहे. लेकिन डेढ़ घंटे तक मौत से जंग लड़ने के बाद कन्हैया ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. हादसे के बाद प्रशासन ने हमेशा की तरह कागजी कार्रवाई तेज कर दी है. टेक्निकल सुपरवाइजर आदित्य श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है. लेकिन अभी भी सवाल वही है कि क्या ये सस्पेंशन और जांच उस मां की गोद भर पाएंगे जिसका बड़ा बेटा चला गया? क्या उस पिता की हिम्मत वापस ला पाएंगे जिसने अपने हाथ से अपने बेटे का जनाजा उठाया?
ADVERTISEMENT









