मेले से लौटकर पूरे परिवार ने खाई थी मैगी-चाय, फूड पॉइजनिंग या कुछ और? 5 लोगों की मौत के मामले में फंसा पेंच

अरुण त्यागी

17 Oct 2026 (अपडेटेड: 17 Oct 2026, 05:13 PM)

ग्रेटर नोएडा के नगला पदम गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव मिलने से सनसनी फैल गई. चाय और मैगी खाने के बाद हुई मौतों में फूड पॉइजनिंग या जहर की आशंका के बीच पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है.

Greater Noida Family Death Case Update

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उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से एक बेहद दर्दनाक, रहस्यमयी और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. रबूपुरा थाना क्षेत्र के नगला पदम गांव में एक ही घर के अंदर माता-पिता और उनके तीन मासूम बच्चों समेत पांच लोगों के शव मिलने से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है. हंसी-खुशी मेला देखकर लौटे परिवार की सुबह ऐसी खौफनाक अंत के साथ खुलेगी, किसी ने नहीं सोचा था. इस सनसनीखेज मामले में पुलिस, फॉरेंसिक टीम और खाद्य विभाग की जांच के बीच एक बड़ा पेंच फंस गया है जहां हर अधिकारी की थ्योरी अलग नजर आ रही है.

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क्या है पूरा मामला

पुलिस और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, यह परिवार रात को करीब 10 बजे बाहर मेला घूमकर अपने घर वापस लौटा था. घर लौटने के बाद रात में चाय और नूडल्स (मैगी) बनाए गए जिसे परिवार के सदस्यों ने खाया. इसके बाद उन्होंने बगल में अस्वस्थ रह रही अपनी बुजुर्ग मां को भी चाय दी और सभी सोने चले गए. सुबह जब एक बच्चे का परीक्षा थी और वह समय पर नहीं उठा तो पड़ोसी बच्चा उसे जगाने पहुंचा. घर के अंदर का खौफनाक मंजर देखकर उसके होश उड़ गए जिसके बाद इस पूरी घटना का खुलासा हुआ.

पहली नजर में फूड पॉइजनिंग की आशंका

मौके पर पहुंचे नोएडा के डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला फूड पॉइजनिंग का प्रतीत हो रहा है. पुलिस, फॉरेंसिक डिपार्टमेंट, फील्ड यूनिट और फूड डिपार्टमेंट की टीमें मौके पर पहुंचीं और सभी साक्ष्य व खाने-पीने के सैंपल सुरक्षित कर लिए हैं. शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट्स आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा. हालांकि पुलिस हर एंगल से मामले की गहराई से छानबीन कर रही है.

फूड सेफ्टी ऑफिसर की थ्योरी ने उलझाया मामला

इस मामले में तब नया पेंच फंस गया जब फूड सेफ्टी ऑफिसर ने शुरुआती तौर पर इसे सामान्य फूड पॉइजनिंग मानने से इनकार कर दिया. अधिकारियों का तर्क है कि आमतौर पर फूड पॉइजनिंग के मामलों में असर दिखने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है. पीड़ित व्यक्ति को उल्टियां और दस्त जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं.

एक साथ परिवार के सभी सदस्यों की बिना किसी सामान्य लक्षण के इस प्रकार मौत हो जाना किसी गंभीर जहर या अन्य संदिग्ध कारण की ओर इशारा करता है, न कि सामान्य फूड पॉइजनिंग की तरफ.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

एक तरफ जहां पुलिस और शुरुआती हालात इसे खाने-पीने से जुड़ी गड़बड़ी बता रहे हैं. वहीं खाद्य विभाग के तर्क ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है. फिलहाल, परिवार में मातम पसरा हुआ है और हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर उस रात उस घर के भीतर ऐसा क्या हुआ था जिसने एक हंसते-खेता परिवार हमेशा के लिए शांत कर दिया. अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के नतीजों पर टिकी हैं.
 

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