बिजनौर के धामपुर क्षेत्र के मोहड़ा गांव में आपसी भाईचारे की एक मिसाल देखने को मिली. गांव में रामलीला का मंचन शुरू होने वाला था, लेकिन इसी दौरान मुस्लिम महिला गफूरन बी का इंतकाल हो गया. उनके निधन से गांव में शोक छा गया. ग्रामीणों ने दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़े होने का फैसला किया और रामलीला का मंचन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया.
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गांव के लोगों का कहना था कि जब परिवार जैसी महिला का निधन हुआ है, तो उत्सव मनाना ठीक नहीं होगा. इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से रामलीला टालने का फैसला लिया.
'कैसे दिल करता कि एक तरफ मय्यत पड़ी हो और दूसरी तरफ रामलीला हो'
गांव के ग्राम प्रधान ऋषि कुमार ने बताया कि गफूरन बी उनके लिए बुआ जैसी थीं. गांव के दूसरे लोग भी उन्हें इसी अपनापन से देखते थे. उन्होंने कहा, 'कैसे दिल करता कि एक तरफ हमारी बुआ समान गफूरन बी की मय्यत पड़ी हो और उधर रामलीला का मंचन हो रहा हो. उनके निधन से गांव में दुख का माहौल था, इसलिए हमने एक दिन के लिए कार्यक्रम टाल दिया.'
ग्राम प्रधान के मुताबिक, रामलीला स्थगित करने का फैसला किसी दबाव में नहीं लिया गया. ग्रामीणों ने खुद महसूस किया कि गांव में शोक के माहौल के बीच आयोजन करना उचित नहीं होगा.
धर्म से पहले रिश्तों को दिया महत्व
मोहड़ा गांव में रामलीला हिंदू समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा आयोजन है. दूसरी ओर, गफूरन बी मुस्लिम समुदाय से थीं. इसके बावजूद उनके निधन पर रामलीला रोकने का फैसला बताता है कि आपसी रिश्ते और संवेदनाएं धार्मिक पहचान से ऊपर हो सकती हैं.
गांव में रहने वाले लोग रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी होते हैं. ऐसे में किसी परिवार पर दुख आने पर उसके साथ खड़े होना सामाजिक रिश्तों का अहम हिस्सा है. मोहड़ा के ग्रामीणों ने इसी भावना के साथ एक दिन के लिए अपना आयोजन स्थगित किया.
छोटे फैसलों से मजबूत होता है भाईचारा
समाज में आपसी सौहार्द की बात अक्सर होती है, लेकिन इसकी असली तस्वीर रोजमर्रा के व्यवहार में दिखाई देती है. किसी के दुख में शामिल होना, उसकी भावनाओं का सम्मान करना और जरूरत के समय साथ खड़े रहना ऐसे कदम हैं, जो लोगों के बीच भरोसा मजबूत करते हैं.
गफूरन बी के निधन पर रामलीला स्थगित करने का फैसला भी ऐसी ही पहल है. गांव के लोगों ने उनके प्रति अपने लगाव और सम्मान को अपने फैसले से जाहिर किया. मोहड़ा की घटना बताती है कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी एक-दूसरे के सुख-दुख को अपना समझ सकते हैं.
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