मथुरा में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला लगातार चर्चा में है. 25 साल के दीपक की मौत हत्या थी या आत्महत्या, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है.
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दीपक की मौत को लेकर अयोध्या के कई संतों ने प्रतिक्रिया दी है. किसी ने इसे बेहद गंभीर घटना बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की, तो कुछ संतों ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी सवाल उठाए. संतों ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा.
कमरे से सामान मिलने और शरीर पर चोट का जिक्र
एक संत ने कहा कि पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन कमरे से ग्राइंडर समेत कुछ सामान मिलने और पोस्टमार्टम में शरीर पर तीन जगह चोट बताए जाने के कारण कई सवाल भी खड़े होते हैं. उनके मुताबिक, शरीर से रक्तस्राव को मौत की वजह बताया गया है और इसलिए पूरे मामले की बारीकी से जांच जरूरी है.
उन्होंने कहा कि अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही कहा कि परिवार की ओर से दीपक से तीन दिन तक नहीं मिलने देने का आरोप लगाया गया है, जिसकी भी जांच होनी चाहिए.
परिवार से मिलने को लेकर संतों की अलग-अलग राय
दीपक के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया गया. इस पर संतों की राय एक जैसी नहीं रही. एक संत ने परिवार के इस आरोप को निराधार बताया. उनका कहना था कि संन्यास और वैराग्य अपनाने के बाद व्यक्ति का परिवार से मिलना-जुलना कम हो सकता है और यह उसकी व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है.
दूसरे संत ने कहा कि परिवार से मिलने का सवाल जांच का हिस्सा होना चाहिए. उन्होंने आदि शंकराचार्य की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान और उनसे मिलना संन्यास परंपरा में भी महत्वपूर्ण माना गया है. उनका कहना था कि अगर माता-पिता दीपक से मिलना चाहते थे तो उन्हें क्यों नहीं मिलने दिया गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए.
'हत्या है या आत्महत्या, जांच से ही पता चलेगा'
संतों ने इस बात पर जोर दिया कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दीपक ने आत्महत्या की या उनकी हत्या हुई. उन्होंने पुलिस से पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक जांच, कमरे से मिले सामान और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करने की मांग की.
एक संत ने कहा कि घटना के बाद किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं है. उनके मुताबिक, फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत सभी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
कुछ संतों ने साजिश का दावा भी किया
वहीं, एक अन्य संत ने इस घटना को साजिश से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका है और इसकी जांच सभी पहलुओं से होनी चाहिए. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं.
उन्होंने प्रेमानंद महाराज की प्रतिष्ठा और उनके शिष्यों से जुड़ी परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है. साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
दीपक लोधी की मौत के मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई. पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल से मिले सामान, मोबाइल और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही पुलिस किसी निष्कर्ष तक पहुंचेगी.
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