कौन जीतेगा शाहजहांपुर नगर की सीट? सुरेश खन्ना के 9 वाले रिकॉर्ड को सबसे बड़ा खतरा ये दिख रहा

Shahjahanpur VidhanSabha 2027: उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर नगर विधानसभा सीट पर लगातार नौ बार जीतने वाले सुरेश खन्ना की राजनीतिक पकड़ मजबूत है. वे वर्तमान में राज्य के वित्त मंत्री हैं और इस बार भी चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है. समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष और कवायद करने वाले तनवीर खान ने पिछली बार दस हजार वोटों के अंतर से हार झेली है.

यूपी तक

• 03:47 PM • 11 Feb 2026

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Shahjahanpur VidhanSabha 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ सीटें ऐसी हैं जहां वक्त ठहर सा गया है. शाहजहांपुर नगर ऐसी ही एक विधानसभा है जहां पिछले 35 सालों से सुरेश कुमार खन्ना के ही नाम की गूंज है. यूपी सरकार के कद्दावर वित्त मंत्री और 9 बार के विधायक सुरेश खन्ना के सामने इस बार भी वही पुरानी चुनौती है. क्या वे अपना दहाई का आंकड़ा पूरा करेंगे? दूसरी ओर समाजवादी पार्टी है जो हर बार करीब आकर भी पटखनी खा जाती है. 2027 के चुनाव से पहले यहां की सियासी तपिश अभी से महसूस की जा रही है.

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9 बार की जीत और एंटी-इनकंबेंसी का तिलस्म

शाहजहांपुर नगर सीट आज अपनी पहचान सुरेश खन्ना के नाम से पाती है. लगातार 9 बार जीतना कोई छोटी बात नहीं है और वह भी तब जब हर चुनाव में उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर की चर्चा होती है. बीजेपी के जिला अध्यक्ष इस बार भी पूरी तरह कॉन्फिडेंट हैं. उनका कहना है कि 'भारतीय जनता पार्टी चुनाव के लिए सदैव तैयार रहती है. हमारे कार्यकर्ता बूथ स्तर तक काम कर रहे हैं. चुनाव की घोषणा होते ही हम एक बार फिर भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे.'

हार की हैट्रिक के बाद क्या मिलेगा चौथा मौका?

सपा की ओर से तनवीर खान पिछले तीन चुनावों (2012, 2017, 2022) से सुरेश खन्ना को टक्कर दे रहे हैं.पिछली बार हार का अंतर महज 10,000 वोटों से भी कम था. तनवीर खान शाहजहांपुर के पूर्व चेयरमैन और सपा जिला अध्यक्ष भी हैं. राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां का चुनाव अक्सर हिंदू बनाम मुस्लिम की धुरी पर घूम जाता है. शहरी मुस्लिम वोट और सपा का पारंपरिक वोट तनवीर के साथ जुड़ता है. लेकिन जैसे ही चुनाव ध्रुवीकरण की ओर बढ़ता है हिंदू वोट एकजुट होकर सुरेश खन्ना के पाले में चला जाता है.

2027 के बड़े सवाल: क्या बदलेंगे चेहरे?

जैसे-जैसे 2027 नजदीक आ रहा है दो मुख्य चर्चाएं गर्म हैं. खन्ना जी का उत्तराधिकारी कौन? क्या सुरेश खन्ना 10वीं बार खुद मैदान में उतरेंगे या इस बार बीजेपी किसी नए चेहरे को मौका देगी? हालांकि उनकी सक्रियता को देखते हुए उनके ही लड़ने के आसार ज्यादा हैं. क्या सपा लगातार तीन बार हार चुके तनवीर खान पर फिर भरोसा करेगी या इस बार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत किसी दलित चेहरे को उतारकर सबको चौंका देगी?