भारतीय सेना के मेजर मधुर चौधरी और कैप्टन ज्योति सरोत की शादी एक मिसाल बनकर सामने आई है. यह शादी न केवल प्यार का प्रतीक है बल्कि समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ ठोस संदेश भी प्रस्तुत करती है. इस शादी में केवल एक रुपए का शगुन और एक नारियल लिया गया. सहारनपुर के बीरपुर गांव में हुई यह शादी दोनों परिवारों और समाज के लिए प्रेरणादायक साबित हुई है
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दोनों परिवारों की मुलाकात मथुरा की धार्मिक यात्रा के दौरान हुई थी. धीरे-धीरे उनकी बातचीत रिश्ते में तब्दील हुई. दूल्हे के पिता, चौधरी ओमपाल सिंह, खुद सेना से रिटायर्ड अधिकारी हैं और उन्होंने दहेज रहित शादी को सामाजिक अभियान के रूप में लिया. उनका मानना है कि बेटियों को बोझ नहीं मानना चाहिए बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है.
इस शादी ने पारंपरिक शगुन और महंगे उपहारों से परे एक नई सोच को जन्म दिया है. जहां आमतौर पर शादी में शोर-शराबा और महंगे गिफ्ट्स होते हैं, वहीं इस सादगी पूर्ण समारोह ने हर किसी का दिल जीत लिया. यह संदेश देता है की बच्चों को गुणवान बनाएं धनवान नहीं। यह दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत कदम माना जा रहा है.
यह विवाह सिर्फ एक शादी नहीं बल्कि समाज को सशक्त और जागरूक बनाने का प्रयास है. ऐसे उदाहरण समाज में बहुत जरूरी हैं जो लड़कियों की इज्जत और समानता की बात करते हैं. दोनों दूल्हा-दुल्हन भारतीय सेना के अधिकारी हैं, इसलिए उनकी तैनाती के बारे में गुप्तता बनी हुई है. फिर भी उनकी शादी समाज में बदलाव का प्रतीक बनी है.
यह शादी हर व्यक्ति के लिए दहेज प्रथा को खत्म करने और समाज में सरलता लाने की प्रेरणा है. इससे यह स्पष्ट होता है कि शादी केवल रिश्ते का उत्सव है ना कि धन-दौलत का आदान-प्रदान. इस तरह के कदम समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं.
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