Ex- IAS Divya Mittal News: आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का ऐलान कर चुकीं दिव्या मित्तल के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं. उन्होंने 15 अक्टूबर को अपने भविष्य की रणनीति का ऐलान करने की बात कही है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगी, 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगी या फिर किसी नए राजनीतिक संगठन की शुरुआत करेंगी? मिर्जापुर में नवरात्र के दौरान डांडिया कार्यक्रमों में शामिल हो रहीं दिव्या मित्तल के अगले कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राजा भैया की जनसत्ता दल की ओर से उन्हें साथ आने के प्रस्ताव मिलने की चर्चा भी इस घटनाक्रम को दिलचस्प बना रही है.
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राजनीति में क्यों आ रहीं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की आईएएस सेवा के बाद नौकरी छोड़ने का फैसला किया. वह मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर रह चुकी हैं. अपने कार्यकाल के दौरान उनकी पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली वाली अधिकारी के रूप में बनी. हालांकि, जनप्रतिनिधियों के साथ उनके मतभेदों की भी चर्चा होती रही. मिर्जापुर में तैनाती के दौरान विकास कार्यों को लेकर उनका स्थानीय नेताओं से टकराव सामने आने की बात कही जाती रही है. अब नौकरी छोड़ने के बाद उनके राजनीति में आने के फैसले ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है.
15 अक्टूबर को क्या ऐलान करेंगी दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल ने एक दिन पहले सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर 15 अक्टूबर को अपने भविष्य के कदम की घोषणा करने की बात कही. इसी के बाद उनके राजनीतिक फैसले को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. चर्चा है कि वह चुनाव लड़ने, किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक राह बनाने का ऐलान कर सकती हैं. हालांकि, उनके अगले कदम को लेकर अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में 15 अक्टूबर को होने वाली उनकी घोषणा अहम मानी जा रही है.
मिर्जापुर ही क्यों दिव्या मित्तल का राजनीतिक केंद्र?
दिव्या मित्तल की संभावित राजनीतिक पारी का केंद्र मिर्जापुर माना जा रहा है. यहां जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में विकास कार्यों पर जोर दिया था. खासकर जल जीवन मिशन के तहत उन गांवों तक पानी पहुंचाने के प्रयासों का जिक्र होता रहा है, जहां लंबे समय से पेयजल की समस्या थी. इन कामों के चलते स्थानीय स्तर पर उन्हें समर्थन भी मिला. हालांकि, प्रशासनिक कामों की लोकप्रियता को चुनावी सफलता में बदलना अलग चुनौती है. चुनाव में बूथ स्तर पर संगठन, कार्यकर्ताओं और मजबूत राजनीतिक नेटवर्क की भूमिका अहम होती है.
जनसत्ता दल के प्रस्ताव की चर्चा
मिर्जापुर की राजनीति में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मजबूत मौजूदगी है. वह इस क्षेत्र से कई बार सांसद चुनी जा चुकी हैं. दिव्या मित्तल की जिलाधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान अनुप्रिया पटेल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ उनके मतभेदों की चर्चा रही. आरोप लगते रहे कि विकास कार्यों के दौरान जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया. दूसरी ओर, राजा भैया की जनसत्ता दल की ओर से दिव्या मित्तल को पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की भी चर्चा है. अनुप्रिया पटेल और राजा भैया के बीच राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में इस प्रस्ताव को देखा जा रहा है. हालांकि, दिव्या मित्तल ने किस दल के साथ जाने का फैसला किया है, यह स्पष्ट नहीं है.
विधानसभा चुनाव या लोकसभा चुनाव?
दिव्या मित्तल के सामने संभावित विकल्पों में 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव शामिल बताए जा रहे हैं. यदि वह विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो उन्हें सीमित समय में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना होगा. वहीं, लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए उनके पास अपेक्षाकृत अधिक समय होगा. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की पेशकश किए जाने की चर्चा है. हालांकि, किसी पार्टी में शामिल होने या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने को लेकर उनकी ओर से अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.
योगी आदित्यनाथ के मिर्जापुर दौरे के बीच घोषणा पर नजर
15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी मिर्जापुर में कार्यक्रम प्रस्तावित है. इसी दिन दिव्या मित्तल की घोषणा होने के कारण राजनीतिक हलकों में इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी राजनीतिक संदेश या टकराव का निष्कर्ष निकालने के लिए फिलहाल पर्याप्त जानकारी नहीं है. दिव्या मित्तल नवरात्र के दौरान मिर्जापुर में डांडिया कार्यक्रमों में भी शामिल हो रही हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह राजनीति में अपनी शुरुआत किस रूप में करेंगी. क्या वह किसी पार्टी का दामन थामेंगी, स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगी या पहले मिर्जापुर में अपना राजनीतिक आधार तैयार करेंगी? इन सवालों का जवाब 15 अक्टूबर को होने वाली उनकी घोषणा से मिल सकता है.
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