राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, और विनोद चतुर्वेदी ने कांग्रेस से मुकाबले में भाजपा को मजबूत करने के लिए बड़ी जिम्मेदारी उठाई है. ये विधायक पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे, लेकिन कई कारणों से उनकी पार्टी से दूरी बढ़ गई. अब ये भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ेंगे, जिससे अमेठी की सियासत में बड़ा बदलाव आने की संभावना है.
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राकेश प्रताप सिंह ने कभी युवा ब्रिगेड में अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी और लगातार तीन बार गौरीगंज विधानसभा जीत चुके हैं. हालांकि वर्षों से वे भाजपा के प्रति अधिक झुकाव दिखा रहे थे. उनके भाजपा में शामिल होने से भाजपा के लिए गौरीगंज सीट पर जीत की उम्मीद बढ़ गई है जो पहले कभी भाजपा के हाथ नहीं आई.
समाजवादी पार्टी ने उन्हें अनसुना किया जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया. उनका कहना है कि उनकी पार्टी अब सनातन की विरोधी बन चुकी है और इसलिए वे अब भाजपा के साथ हैं. इस जॉइनिंग से अमेठी में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और भाजपा की स्थिति मजबूत हो सकती है.
भाजपा ने इस अवसर पर जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक रणनीति बनाई है, जिससे क्षेत्रीय और वर्गीय वोटों का संतुलन बना रहे. स्मृति ईरानी समेत कई वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. इस बदलाव के बाद आने वाले चुनावों में अमेठी की सियासत में नई लड़ाई देखने को मिल सकती है.
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