अयोध्या में बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. शहर के कई इलाकों में सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कें तो खोदी गईं, लेकिन काम खत्म होने के बाद उनकी मरम्मत ठीक से नहीं की गई. नतीजा यह है कि अयोध्या की सड़कें गड्ढों और टूटी ईंटों के मलबे में तब्दील हो गई हैं, जो पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं.
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बारिश का डर: घरों में घुस रहा है पानी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब उन्हें बरसात के मौसम से डर लगने लगा है.
- जलमग्न सड़कें: हल्की बारिश होते ही सड़कें तालाब बन जाती हैं. जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुँच रहा है.
- दैनिक जीवन प्रभावित: सड़कों की बदहाली और जलभराव के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.
अधूरे काम और प्रशासनिक लापरवाही
- पार्षदों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी मौका मुआयना करने तो आते हैं, लेकिन मरम्मत का काम अक्सर अधूरा ही छोड़ दिया जाता है.
- भेदभाव का आरोप: स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक भेदभाव के कारण विकास कार्य रुके हुए हैं.
- समय पर नहीं होती कार्रवाई: जनता का सवाल है कि जब मौसम ठीक रहता है, तब प्रशासन मरम्मत क्यों नहीं करता? बारिश शुरू होने के बाद आनन-फानन में की गई मरम्मत टिकती नहीं है और फिर वही समस्या खड़ी हो जाती है.
विकास की चमक में 'बदहाली' का दाग
अयोध्या के कई मोहल्लों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. एक तरफ जहाँ शहर को भव्य रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन मोहल्लों की नारकीय स्थिति प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है. निवासियों का कहना है कि अगर अयोध्या को वाकई विश्व स्तरीय शहर बनाना है, तो सबसे पहले जल निकासी और सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं को जड़ से खत्म करना होगा.
फिलहाल, अयोध्या की जनता प्रशासन से जवाबदेही और जल्द से जल्द सुधार कार्य शुरू करने की मांग कर रही है ताकि आने वाले मानसून में उन्हें नारकीय जीवन न जीना पड़े.
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