क्या वे रेबीज के शिकार बच्चों को वापस ला पाएंगे.. पशु प्रेमियों को SC ने फटकारा, नोएडा में 7 महीने के भीतर एक लाख से ज्यादा डॉग बाइट

नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर की सड़कों और गलियों को आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा आदेश दिया है.

Supreme court scold dog lovers

यूपी तक

• 07:08 PM • 11 Aug 2025

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नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर की सड़कों और गलियों को आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर होम में रखा जाए. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पशु प्रेमियों को भी कड़ी फटकार लगाई और उनसे पूछा कि "क्या वे रेबीज के शिकार हुए बच्चों को वापस ला पाएंगे?" 

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सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला जानिए

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की. पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की स्थिति को "बेहद गंभीर" बताते हुए कहा कि कुछ लोगों के "पशु प्रेमी" होने की भावना की वजह से बच्चों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यह समय कार्रवाई करने का है, केवल बहस का नहीं.

कोर्ट ने अधिकारियों को ये निर्देश दिए हैं:

अगले छह से आठ हफ्तों में 5,000 आवारा कुत्तों के लिए डॉग शेल्टर होम बनाए जाएं.

इन शेल्टर होम में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था हो.

शेल्टर होम पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी कुत्ते को वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए.

आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए एक विशेष बल का गठन किया जाए.

कोई भी व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

नोएडा में कुत्तों के काटने के मामलों का ये आंकड़ा जान आप चौंक जाएंगे 

जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर सख्त रुख अपनाया है, वहीं दिल्ली से सटे नोएडा में स्थिति बेहद चिंताजनक है. गौतमबुद्ध नगर जिले के डिप्टी सीएमओ टीकम सिंह के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2025 के बीच करीब 1 लाख 8 हजार डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए हैं. इसका मतलब है कि औसतन हर महीने लगभग 14 हजार लोग कुत्तों के शिकार हो रहे हैं. अकेले जुलाई में यह संख्या 18 हजार से ज्यादा थी. जिले के अस्पतालों में रोजाना 500 से अधिक लोग रेबीज का टीका लगवाने पहुंचते हैं. इनमें से 95% मामले कुत्तों के काटने के होते हैं.