प्राइवेट पार्ट तोड़कर नागा साधु बनने वाली बात अब पुरानी हो गई, नई प्रक्रिया इन बाबा से जान लीजिए

Mahakumbh 2025 : प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से होगी, लेकिन महाकुंभ के प्रति आस्था और श्रद्धा का रंग अभी से बिखरने लगा है. महाकुंभ में देशभर से साधु-संन्यासियों का आगमन हो रहा है.

कुमार अभिषेक

10 Jan 2025 (अपडेटेड: 10 Jan 2025, 05:52 PM)

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Naga Sadhus in Mahakumbh 2025: प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से होगी, लेकिन महाकुंभ के प्रति आस्था और श्रद्धा का रंग अभी से बिखरने लगा है. महाकुंभ में देशभर से साधु-संन्यासियों का आगमन हो रहा है. नागा साधुओं की तपस्या और जीवनशैली हमेशा से रहस्य और कौतूहल का विषय रही है. हमारी मुलाकात ऐसे ही एक नागा साधु दिगंबर विजय पुरी से हुई, जो अपने शरीर पर सवा लाख रुद्राक्ष धारण किए हुए हैं. उन्होंने नागा साधु बनने की नई प्रक्रिया और जीवनशैली पर कई अहम जानकारियां साझा कीं.

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दिगंबर विजय पुरी मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर से प्रयागराज पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि नागा साधु बनने के लिए 12-13 साल की कठिन तपस्या और संयम की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया, "हमारा जीवन त्याग और तपस्या का है. भस्म ही हमारा वस्त्र है, और रुद्राक्ष हमें मानसिक शांति प्रदान करता है. मैंने अपने शरीर पर 35 किलो वजनी सवा लाख रुद्राक्ष धारण किए हैं."

 

 

उन्होंने आगे बताया कि नागा साधु बनने की प्रक्रिया में पहले शारीरिक झटके दिए जाते थे, जिससे कई साधुओं की मृत्यु हो जाती थी. लेकिन अब, इस प्रक्रिया को आयुर्वेदिक औषधियों की सहायता से किया जाता है. ये औषधियां कामवासना पर काबू पाने में मदद करती हैं.

"कामवासना से मुक्ति मन को नियंत्रित करने पर निर्भर करती है. आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ मन को आत्मा की ओर केंद्रित करना सबसे महत्वपूर्ण है," बाबा ने कहा.

 

 

उन्होंने बताया कि नागा साधुओं का मुख्य उद्देश्य बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाना है. उनके अनुसार, नागा बनने की दीक्षा रात के सबसे शांत समय, 2 से 2:30 बजे के बीच दी जाती है, और यह प्रक्रिया 48 घंटे तक चलती है.

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