यूपी में बनेगा 150 KM का नया एक्सप्रेसवे, मुरादाबाद से अलीगढ़ का सफर होगा आसान; 3-4 घंटे की जगह इतना लगेगा समय

आयशा शेख़

• 04:26 PM • 14 Oct 2026

Moradabad-Aligarh Highway: उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद से अलीगढ़ का सफर आसान करने के लिए करीब 150 किलोमीटर लंबे हाईवे को चार लेन का बनाने की तैयारी है. मुरादाबाद के 22 गांवों और अलीगढ़ की 45 गांवों की जमीन अधिग्रहण के लिए चिन्हित की गई है.

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तस्वीर प्रतीकात्मक है.

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उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सड़क से सफर करने वालों के लिए एक नया हाईवे कनेक्टिविटी बेहतर करने वाला है. करीब 150 किलोमीटर लंबे मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे को चार लेन का बनाने की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए मुरादाबाद और अलीगढ़ में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर पहले के मुकाबले कम समय में पूरा हो सकेगा.

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अभी मुरादाबाद से अलीगढ़ पहुंचने में चंदौसी, बहजोई, बाबराला और डिबाई जैसे रास्तों से गुजरते हुए करीब 3 से 4 घंटे लग सकते हैं. सड़क पर जाम, संकरे हिस्सों और भारी वाहनों की वजह से सफर लंबा हो जाता है. नए हाईवे से यात्रा का समय घटकर करीब डेढ़ से दो घंटे रहने की उम्मीद है. हालांकि, इसके लिए परियोजना का पूरा होना और सड़क पर यातायात शुरू होना जरूरी है.

किन जिलों से होकर गुजरेगा नया हाईवे?

प्रस्तावित हाईवे मुरादाबाद से शुरू होकर अमरोहा, संभल और बुलंदशहर होते हुए अलीगढ़ तक पहुंचेगा. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.

परियोजना के तहत मौजूदा दो लेन वाले मार्ग को चार लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित किया जाना है. एक्सेस-कंट्रोल्ड का मतलब है कि वाहन किसी भी गांव या स्थानीय सड़क से सीधे हाईवे पर नहीं चढ़ सकेंगे. इसके लिए तय प्रवेश और निकास बिंदु बनाए जाएंगे.

22 गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी

हाईवे के निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मुरादाबाद जिले के 22 गांवों में करीब 190 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज की है. अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के मालिकों और किसानों को मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में देने की योजना है.

अलीगढ़ जिले में भी जमीन अधिग्रहण किया जाएगा. इसके लिए गभाना और कोल तहसीलों के 45 गांवों की जमीन चिन्हित की गई है. मुरादाबाद में जिन इलाकों के इस परियोजना से प्रभावित होने की संभावना है, वहां प्रशासन ने जमीन की खरीद-बिक्री और नए बैनामों पर रोक लगा दी है. इसका उद्देश्य अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जमीन से जुड़े लेनदेन को नियंत्रित रखना है.

हाईवे पर 100 KM प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे वाहन

प्रस्तावित हाईवे पर वाहनों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना बताई गई है. हालांकि, वास्तविक गति सीमा सड़क के डिजाइन और लागू यातायात नियमों के अनुसार तय होगी. हाईवे पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों को चलने की अनुमति नहीं होगी. वाहन केवल निर्धारित इंटरचेंज से ही प्रवेश कर सकेंगे और बाहर निकल सकेंगे.

सुरक्षा के लिए परियोजना में अंडरपास, ऊंचाई पर बने बाईपास और पैदल यात्रियों के लिए पुल बनाने की योजना भी शामिल है. इससे भारी ट्रकों, कृषि वाहनों और स्थानीय यातायात के बीच टकराव की आशंका कम करने में मदद मिलेगी. अलीगढ़-मुरादाबाद मार्ग पर एक बड़े पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है. इसके लिए जून 2026 में 12.5 करोड़ रुपये का निर्माण टेंडर जारी किए जाने की जानकारी दी गई है.

गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ने की योजना

मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे को बदायूं लिंक के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है. कनेक्शन बनने पर मुरादाबाद और अलीगढ़ से प्रयागराज समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के दूसरे इलाकों तक पहुंचना आसान हो सकता है.

गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाली अहम सड़क परियोजना है. नए हाईवे का इससे जुड़ना यात्रियों को लंबी दूरी के सफर के लिए एक अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध करा सकता है. 

आगरा तक भी बेहतर होगी कनेक्टिविटी

मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे के साथ आगरा-अलीगढ़ चार लेन परियोजना भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम है. आगरा-अलीगढ़ मार्ग के पहले 28 किलोमीटर के हिस्से को चौड़ा करने का काम मार्च में शुरू होने की जानकारी दी गई है. इस हिस्से का काम 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है.

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुरादाबाद से अलीगढ़ और आगे आगरा की दिशा में चार लेन की बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी. इससे यात्रियों के साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी फायदा मिलने की संभावना है.

जमीन और वेयरहाउसिंग की बढ़ रही मांग

प्रस्तावित हाईवे के आसपास के इलाकों में भी इसका असर दिखने की बात सामने आई है. हरदुआगंज, पनैठी और गभाना के आसपास कृषि भूमि, रियल एस्टेट, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की मांग बढ़ने की जानकारी दी गई है.

हाईवे बनने से इन इलाकों में माल की आवाजाही आसान हो सकती है. हालांकि, जमीन की कीमतों में कितना बदलाव होगा या कितने नए कारोबार शुरू होंगे, यह परियोजना की प्रगति और स्थानीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.

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