Shukra Ketu Yuti 2026: 4 जुलाई से बदलेगी ग्रहों की चाल! शुक्र-केतु की दुर्लभ युति इन 4 राशियों के लिए ला सकती है बड़ी मुश्किलें, ज्योतिषियों ने दी सतर्क रहने की सलाह
यूपी तक
• 08:18 AM • 26 Jun 2026
4 जुलाई 2026 को शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति बनेगी. वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह ग्रह संयोग कुछ राशियों के जातकों के लिए कुछ चुनौतियां आ सकता है.
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वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की युति और राशि परिवर्तन को बेहद प्रभावशाली माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को सुख, वैभव, प्रेम और भौतिक सुविधाओं के कारक शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही केतु विराजमान हैं. ऐसे में सिंह राशि में शुक्र-केतु की युति बनेगी, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जा रहा है.


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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र और केतु के स्वभाव एक-दूसरे से विपरीत माने जाते हैं. जहां शुक्र सुख-सुविधा, प्रेम, रिश्तों और विलासिता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं केतु वैराग्य, भ्रम, अप्रत्याशित घटनाओं और आध्यात्मिकता के कारक हैं. ऐसे में इन दोनों ग्रहों की युति कुछ राशियों के जीवन में अस्थिरता, भ्रम और चुनौतियां बढ़ा सकती है.
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वृषभ राशि के लिए यह युति विशेष रूप से प्रभावशाली रहेगी क्योंकि इस राशि के स्वामी स्वयं शुक्र हैं. चतुर्थ भाव में बनने वाला यह योग घरेलू सुख-सुविधाओं में कमी ला सकता है. परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बढ़ने और घर का माहौल तनावपूर्ण रहने की संभावना है. इस अवधि में वाहन या संपत्ति खरीदने से बचना बेहतर रहेगा. यात्रा करते समय भी अतिरिक्त सतर्कता बरतें, क्योंकि चोट लगने या अचानक बड़े खर्च सामने आने के योग बन सकते हैं.


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सिंह राशि वालों पर इस युति का सबसे सीधा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि यह योग उनकी ही राशि में बनने जा रहा है. जीवनसाथी या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं और रिश्तों में दूरी महसूस हो सकती है. मानसिक तनाव, अनजाना भय और भावनात्मक अस्थिरता परेशान कर सकती है. इस दौरान खान-पान का विशेष ध्यान रखें और बातचीत में संयम बनाए रखें, क्योंकि छोटी-सी बात भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है.
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तुला राशि के जातकों के लिए यह युति आय, लाभ और सामाजिक संबंधों से जुड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है. निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है और उधार दिया गया धन फंसने की आशंका भी बनी रहेगी. सामाजिक दायरे में आपकी बातों का गलत अर्थ निकाला जा सकता है, जिससे मित्रों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं. वहीं कार्यस्थल पर आपकी मेहनत का श्रेय किसी अन्य व्यक्ति को मिलने से निराशा हो सकती है.


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वृश्चिक राशि वालों के करियर और पेशेवर जीवन पर भी इस ग्रह योग का असर देखने को मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों और कारोबारियों दोनों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. कार्यस्थल पर विरोध या साजिश जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ऐसे समय में जल्दबाजी में नौकरी बदलने या किसी अनैतिक कार्य में शामिल होने से बचना ही बेहतर रहेगा.
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इस पूरे गोचर काल में सभी प्रभावित राशियों को धैर्य और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है. आर्थिक मामलों में जोखिम उठाने से बचें, रिश्तों में संवाद बनाए रखें और भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें. संयमित व्यवहार और सावधानी इस अवधि में संभावित समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकती है.


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शुक्र-केतु युति के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए प्रतिदिन 'ॐ शुं शुक्राय नमः' और 'ॐ कें केतवे नमः' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. शुक्रवार के दिन चावल, दूध और चीनी जैसी सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है. साथ ही भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें दूर्वा अर्पित करने से केतु से जुड़े दोषों को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की मान्यता है.
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