Video: UPSI 2021 भर्ती मामले में कोर्ट के सवालों का बोर्ड ने ये दिया जवाब, जानिए

Video: UPSI 2021 भर्ती मामले में कोर्ट के सवालों का बोर्ड ने ये दिया जवाब, जानिए
फोटो: यूपी तक

पिछले दिनों हुई उत्तर प्रदेश पुलिस की दारोगा भर्ती (UP Police SI Recruitment 2021) में कथित धांधली का मुद्दा अब कोर्ट में पहुंच गया है. 28 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट में अफसरों के द्वारा जो भी जवाब दाखिल किया गया और जो डाक्यूमेंट्स पेश किए गए. उस पर कोर्ट ने अफसरों से साफ कहा कि कागजात एफिडेविट के साथ फाइल किए जाएं और कोर्ट को एफिडेविट के साथ बताया जाए कि सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में क्या कार्रवाई की गई, अब तक मामले का क्या स्टेटस है, दर्ज कराई गई एफआईआर का स्टेटस और NSEIT को ही नोडल एजेंसी बनाने के पीछे की वजह को एफिडेविट में पेश करें.

आपको बता दें कि अब मामले पर अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी. यूपी एसआई भर्ती परीक्षा (UP SI Recruitment Exam) में कथित गड़बड़ी पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दाखिल की गई याचिका पर 28 जुलाई से पहले 25 जुलाई को भी सुनवाई हुई थी. बीते हफ्ते दाखिल की गई याचिका पर हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड के अफसरों को तलब किया था.

याचिकाकर्ता संदीप परिहार और 28 याची के इस मामले को हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में 25 जुलाई को जज आलोक माथुर द्वारा सुना गया. मुख्य रूप से 2 आरोप लगाए गए. पहला आरोप है कि एग्जाम के दौरान ही 23 नवंबर 2021 को गोरखपुर के रामगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई गई IPC की सेक्शन 116,120B, 419, 420, 467,468, 471 और कहा गया कि कई ऐसे लोग थे, जिनके अंडर एग्जाम सेंटर में सॉल्वर बैठा रखे थे, जो ऑनलाइन पेपर सॉल्व कर रहे थे और ये एग्जाम सेंटर NSEIT (एग्जाम कंडक्ट करने वाली एजेंसी) ने Appoint किए थे. गोरखपुर STF की तरफ से FIR दर्ज की गई थी. इसके बाद एक के बाद एक गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, बनारस, आगरा, बरेली और लखनऊ से कुल 33 FIR दर्ज किए गए.

इसके अलावा दूसरा बड़ा आरोप है कि जब एग्जाम कंडक्ट करने वाली एजेंसी NSEIT पर पहले भी इसी तरह के आरोप 2017 की यूपी पुलिस भर्ती में लगाए गए थे, जिसकी जांच भी हुई और पाया गया कि जितने आरोप लगाए गए थे वो सही थे. एग्जाम को गैरकानूनी और अनधिकृत तरीके से पेपर से पहले ही लीक हो गया था, तो फिर से इस एजेंसी से क्यों एग्जाम करवाया गया?

इसपर कोर्ट ने कहा कि हम उस कारण को नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर क्यों इतना कुछ होने के बाद भी राज्य सरकार ने अभी तक उसी एजेंसी से एग्जाम करवाया, जो पहले से पेपर लीक में शामिल थी.

28 जुलाई को हुई सुनवाई में भर्ती बोर्ड की तरफ से जवाब दाखिल किया गया कि एजेंसी ने जांच के दौरान मिली खामियों को दुरुस्त कर दिया था, जिसकी वजह से NSEIT को सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में नोडल एजेंसी बनाया गया. जिसपर कोर्ट ने साफ कहा कि एक बार गलती करने के बाद इसकी क्या गारंटी है कि दोबारा चूक नहीं की गई.

अब आगे 18 अगस्त को अगली सुनवाई है और भर्ती बोर्ड अपने जवाब को प्रॉपर एफिडेविट के साथ पेश करेगा. जिसपर कोर्ट अपना आगे का फैसला लेगा. याद दिला दें कि मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी पुलिस दरोगा भर्ती का ऐलान किया था. इसके बाद 1 अप्रैल 2021 से 15 जून 2021 तक 12 लाख बच्चों ने फॉर्म भरे थे. कुल 9, 534 पदों पर भर्ती होनी थी. 12 नवंबर से 2 दिसंबर तक परीक्षा ऑनलाइन मोड में संपन्न हुई. 7.61 लाख अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया.

14 अप्रैल 2022 को मेरिट जारी कर दी गई. इस मेरिट लिस्ट में कुल 36,170 सफल अभ्यर्थियों के नाम थे, लेकिन जब अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया, तो एग्जाम के दौरान बड़े पैमाने पर हुई धांधली का भंडाफोड़ हुआ.

कई अभ्यर्थी ऐसे भी थे, जिन्होंने पहले एक घंटा तो कुछ नहीं किया और उसके बाद बाद मात्र 9 से 10 मिनट में 160 में से 150 से लेकर 158 तक सवाल हल कर दिए, जबकि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी थे, जिन्होंने दो घंटे का पेपर जादुई तरीके से महज तीन मिनट में हल कर दिया.

जब ऐसे अभ्यर्थियों को पकड़ा गया और जांच हुई तो पता चला कि उनका कम्प्यूटर स्क्रिन शेयरिंग के जरिए बाहर से मैनेज किया जा रहा था. जैसे-जैसे अभ्यर्थी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और शारीरिक परीक्षण के लिए आते गए वैसे-वैसे परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होता गया. अब यह पूरा मामला कोर्ट में है.

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UPSI भर्ती: हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उठाए सवाल, यहां जानिए धांधली के आरोप की पूरी कहानी

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