फिरोजाबाद ग्राउंड रिपोर्ट: PHC पर डॉक्टर नहीं, अस्पताल के बाहर व पेड़ के नीचे हो रहा इलाज

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फिरोजाबाद में जहां डेंगू और बुखार के संक्रमण से लोगों की मौतें हो रही हैं, तो वहीं मेडिकल कॉलेज में बने बच्चा वॉर्ड में गंभीर मरीज के अलावा सामान्य मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है. जिले में हालत यह हो गई है कि प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक पर ही कई दर्जन मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

फिरोजाबाद के गांव नगला चूरा में सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद है. बताया गया कि जिस डॉक्टर की यहां ड्यूटी थी उन्हें कहीं और ड्यूटी पर लगाया गया है. इस कारण से इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अब कोई डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ नहीं आते हैं.

ग्रामीण इलाके में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बंद होने से उस इलाके के मरीज सीधे मेडिकल कॉलेज में बीमारों को लेकर आ रहे हैं, जिससे मेडिकल कॉलेज पर काफी ज्यादा मरीजों का दवाब पड़ रहा है. वहीं ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर भी भारी भीड़ जुटने लगी है. निजी हॉस्पिटल और प्राइवेट डॉक्टरों के यहां मरीजों की लंबी-लंबी लाइन लगी हुई है.

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गांव नगला चूरा में अन्य जगहों की तरह वायरल फैला है. अब हाल यह है कि डॉक्टर खुद मरीजों के घर पर या किसी खुले हॉल में तख्त डालकर उसपर मरीजों को लेटाकर बोतल लगा देते हैं और इसके बदले में एक मरीज से 400 रुपये वसूले ले रहे हैं.

जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने कहा, “हमने जो झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही की है, उसका कड़ा संदेश गया है. यह लोग अपनी दुकान बंद करके भी भागे हैं. हमने 300 के आसपास पूरे शहर में झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित किया है और यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है. मुझे लगता है कि लोग इतने जागरूक हो गए हैं कि अब वह झोलाछाप डॉक्टरों के चुंगल में नहीं फंस रहे हैं और प्राइवेट हॉस्पिटल में भीड़ दर्शाती है कि झोलाछाप डॉक्टरों से लोग इलाज ना कराकर प्राइवेट हॉस्पिटल में पहुंच रहे हैं.”

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