केशव को CM बनाएंगे अखिलेश? जानें SP सुप्रीमो को BJP में क्यों दिख रहा 'सॉफ्ट टारगेट'?

केशव को CM बनाएंगे अखिलेश? जानें SP सुप्रीमो को BJP में क्यों दिख रहा 'सॉफ्ट टारगेट'?
फोटो कोलाज: यूपी तक

उत्तर प्रदेश की विधानसभा से लेकर मंचों और ट्वीटर पर एक दूसरे के खिलाफ वार के लिए फेमस अखिलेश यादव और केशव प्रसाद मौर्य को लेकर अब नई चर्चा छिड़ गई है. इस बार भी मामला एक दूसरे को लेकर बयानबाजी का ही है, लेकिन इसके मायने अलग हैं. एबीपी न्यूज के एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को 100 विधायक तोड़कर लाने और सीएम की कुर्सी लेने का खुला ऑफर दे दिया. यहां तक कह दिया कि जो बिहार में हो सकता है वो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं हो सकता है.

अहम बिंदु

हालांकि इसी कार्यक्रम में केशव प्रसाद मौर्य (keshav prasad maurya) ने अखिलेश पर पलटवार करते हुए इस ऑफर को ठुकरा दिया. साथ ही उन्होंने ये भी कह दिया कि अखिलेश पहले अपने 100 विधायक बचाएं. वे सब भाजपा में आने को तैयार हैं.

इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (Bhupendra Chaudhary) ने भी ट्वीट कर कहा है- 'केशव जी संगठन के, पार्टी के प्रमाणित एवं भाजपा की विचारधारा के लिए समर्पित कार्यकर्ता हैं. वह सदैव हमारे साथ रहेंगे, किसी स्वार्थ में पड़ने वाले नेता नहीं हैं. वह अखिलेश यादव को चलाएंगे, अखिलेश यादव उन्हें क्या चला पाएंगे.' एक दूसरे ट्वीट में भूपेंद्र चौधरी ने कहा- ' अखिलेश यादव तो अपने गठबंधन की, अपने परिवार की, अपनी पार्टी की, अपने विधायकों की भी चिंता कर लें क्योंकि उनके विधायक हमारे संपर्क में हैं.'

जानिए अखिलेश ने क्या कहा और मौर्य ने क्या जवाब दिया

अखिलेश यादव से जब ये सवाल किया गया कि आप क्यों नहीं केशव प्रसाद मौर्य से कह देते हैं कि न आप उनके खिलाफ बोलेंगे न वे बोलें. इसपर अखिलेश ने कहा- 'वे बहुत कमजोर आदमी हैं. उन्होंने सपना देखा था मुख्यमंत्री बनने का. जो बिहार में हुआ वो यूपी में क्यों नहीं करते हैं. उनमें हिम्मत हैं? उनके साथ तो विधायक भी हैं, एक बार बता रहे थे कि 100 से ज्यादा विधायक हैं. आज भी विधायक ले आएं. सपा समर्थन कर देगी उनका.' इसपर केशव प्रसाद ने कहा- 'उनसे बड़ा पिछड़ों का दूसरा कोई विरोधी यूपी नहीं है. वे एक समंतवादी मानसिकता के बन चुके हैं. सपा नाम की कोई पार्टी नहीं बल्कि परिवार की पार्टी है. बीजेपी को किसी को सहारे की जरूत नहीं है. अपने 100 विधायक बचाएं. वे सब भाजपा में आने को तैयार हैं.'

सत्ता के लिए जल बिन मछली हो गए हैं अखिलेश- केपी मौर्य

बुधवार को केशव प्रसाद मौर्य बाराबंकी पहुंचे. वहां जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव के ऑफर को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा- "अखिलेश यादव जी वैसे ही हैं, जैसे पानी में तड़पती हुई मछली. वे मछली की तड़पन की तरह सत्ता की तलब लिए हुए हैं, लेकिन अब वह 25 साल तक सत्ता में वापस नहीं आने वाले हैं. अब समाजवादी पार्टी समाप्त पार्टी हो गयी है, उनके 113 में से 100 विधायक हमारी भारतीय जनता पार्टी में आना चाहते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी टूट-फूट की राजनीति नहीं करती है, इसलिए हम किसी पार्टी को नहीं तोड़ना चाहते हैं.'

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अखिलेश के इस ऑफर के मायने

राजनीति में यूं ही कोई किसी को पब्लिकली ऑफर नहीं देता. भरसक मंझे हुए नेता अनर्गल प्रलाप से भी बचते हैं. हर बयान के अपने एक मायने होते हैं. यहां आगामी लोकभा चुनाव में अखिलेश यादव की नजर प्रदेश की पिछड़ी जातियों (OBC) के वोट बैंक पर है. चूंकि ओबीसी का एक बड़ा वोट बैंक बीजेपी के पास है.

एक तीर से दो निशाना साध रहे हैं अखिलेश

ऐसे में अखिलेश एक तीर से दो निशाना साध रहे हैं. एक तो इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं वहीं केशव प्रसाद मौर्य के जरिए वे बीजेपी के वोट में भी सेंधमारी करना चाहते हैं. अब सवाल ये उठता है कि जो केशव प्रसाद मौर्य अखिलेश पर हमेशा हमलावर रहते हैं उन्हें ये खुला ऑफर क्यों? कहीं भाजपा में केशव प्रसाद मौर्य को अखिलेश सॉफ्ट टारगेट के रूप में तो नहीं देख रहे?

अहम बिंदु

क्या बीजेपी में साफ्ट टारगेट हैं केपी मौर्य?

ट्वीट वार में सपा ये कई बार इशारा कर चुकी है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बीजेपी में अपमान हो रहा है और उन्हें महत्वहीन बनाया जा रहा है. वर्ष 2017 में केशव प्रसाद मौर्य मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए. योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी होने के बाद इन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया. साथ इन्हें महत्वपूर्ण विभाग पीडब्ल्यूडी दिया गया. योगी 2.0 में ये अपने विधानसभा सिराथू से हार गए. बावजूद इसके इन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया. हालांकि इनसे पीडब्ल्यूडी लेकर ग्रामीण विकास दे दिया गया.

प्रदेश अध्यक्ष भी बनते-बनते रह गए

स्वतंत्रदेव सिंह के बाद प्रदेश अध्यक्ष के नए चेहरे के रूप इनकी चर्चा जोरों पर थी. बस चर्चा ही नहीं थी बल्कि इन्होंने इशारे भी देने शुरू कर दिए. एक ट्वीट में इन्होंने कहा- 'संगठन सरकार से बड़ा है.' इस ट्वीट के बाद लगभग तय माना जा रहा था कि केशव प्रसाद मौर्य ही बीजेपी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे. उनकी बदली हुई बॉडी लैंग्वेज ने भी ये मैसेज देना शुरू कर दिया था पर ऐन मौके पर भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. ऐसे में कहीं न कहीं अखिलेश यादव ये मान रहे हैं कि केशव प्रसाद मौर्य को बीजेपी महत्वहीन कर रही है. इसलिए वे उन्हें सॉफ्ट टारगेट मानकर 100 विधायकों के साथ आने पर खुला ऑफर दे रहे हैं.

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डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले- 'अखिलेश यादव सत्ता के लिए तड़पती हुई मछली की तरह हो गए हैं'

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