यूपी विधानसभा: अखिलेश के आरोपों पर डिप्टी सीएम पाठक ने कहा- उनकी भाषा सड़कछाप थी

यूपी विधानसभा: अखिलेश के आरोपों पर डिप्टी सीएम पाठक ने कहा- उनकी भाषा सड़कछाप थी
स्क्रीन ग्रैब: उत्तर प्रदेश विधानसभा के यू-ट्यूब से.

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव के आरोपों पर सदन में ब्रजेश पाठक ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि मैं अस्पतालों का निरीक्षण करता हूं पर सपाई एसी कमरों के बाहर नहीं निकलते. अपनी बात कहते-कहते ब्रजेश पाठक शायराना हो गए. वे बोले- समझने लगे थे कि आस्तीन छिपा लेगी सब गुनाह उनके, लेकिन गजब हुआ कि सनम बोलने लगे. उन्होंने कहा- नेता विरोधी दल ने जिस भाषा का प्रयोग किया वो एक सड़कछाप की भाषा थी.

ध्यान देने वाली बात है कि अखिलेश यादव ने सदन की कार्यवाही के दूसरे दिन डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से कई सवाल किए थे. इसके साथ उन्होंने पाठक को छापामार मंत्री तक कह दिया था. तब उनके सवालों का जवाब सीएम योगी ने दिया था. सदन की कार्यवाही के तीसरे दिन अखिलेश यादव ने फिर कहा कि डिप्टी सीएम और नेता सदन के बीच तालमेल नहीं है.

इधर ब्रजेश पाठक ने जवाब देते हुए कहा- समाजवादी पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग को लूट का अड्डा बनाया था. मैं अस्पतालों का निरीक्षण करता हूं पर सपाई एसी कमरों के बाहर नहीं निकलते. ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए शायराना अंदाज में कहा- समझने लगे थे कि आस्तीन छिपा लेगी सब गुनाह उनके, लेकिन गजब हुआ कि सनम बोलने लगे. नफरत की एक बूंद ही माहौल बदनुमा कर गयी..जहां से आया है ये झूठ और फरेब का जहर, वो दरिया कैसा होगा..!!

अहम बिंदु

यहां जानिए अखिलेश यादव ने क्या कहा था?

अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम पाठक को घेरते हुए कहा- इतने सारे गलत ट्रांसफर हो गये, लेकिन इन्हें पता ही नहीं. फिर छापेमारी किस बात की थी. अरे छापा मंत्री बन गए कार्रवाई कब करोगे? इनकी स्थिति झोला छाप डॉक्टरों जैसी है जिन्हें कोई नहीं पूछता. जहां-जहां छापे मारे हैं मंत्री जी, आपके जाने के बाद क्या असर हुआ, कभी सोचा है. मैंने एक एम्बुलेंस की तस्वीर लगायी पर मंत्री जी आजकल बहुत स्मार्ट बन रहे हैं. तुरंत ये सोशल मीडिया पर चला दिया कि समाजवादी पार्टी झूठ बोल रही है. लेकिन एक चैनल ने इनकी पोल खोल दी.

बजट की कमी है तो नेता सदन को क्यों नहीं बता रहे- अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा था- अगर बजट की कमी है तो नेता सदन को क्यों नहीं बता रहे. अगर बजट है तो डिप्टी सीएम (ब्रजेश पाठक) को क्यों नहीं दिया जा रहा. शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने दो मंत्रियों को बेरोजगार कर दिया. नेता सदन (सीएम योगी) यह बात क्यों नहीं स्वीकारते की इनके पास स्वास्थ्य के लिए बजट की कमी है या वह अपने डिप्टी सीएम को बजट देना नहीं चाहते हैं.

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