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बसपा MLA उमाशंकर सिंह के निधन पर मायावती हुईं भावुक, बताया किसने दी उन्हें ये दुखद खबर

बलिया की रसड़ा सीट से बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का कैंसर के इलाज के दौरान निधन हो गया. उनके निधन पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर बेहद भावुक पोस्ट लिखकर शोक जताया और श्रद्धांजलि दी.

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Mayawati reaction on Umashankar Singh
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बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. उमाशंकर सिंह ने गुरूग्राम की फोर्टिस अस्पताल में आखिरी सांस ली. वह लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. अपने इकलौते विधायक की मौत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पोस्ट कर दुख जताया है. मायावती ने उमाशंकर सिंह को पार्टी का कर्मठ, ईमानदार और वफादार नेता बताया. उन्होंने यह भी बताया कि उमाशंकर सिंह का परिवार उन्हें बड़ी बहन की तरह आदर-सम्मान देता है और इस कठिन समय में पूरी बहुजन समाज पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी है. 

उमाशंकर सिंह के निधन पर मायावती का इमोशनल पोस्ट

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा 'बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद. उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना. पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है. उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं. उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की खबर उनके पुत्र से ही मिली. इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है. कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे.'

पार्टी के सबसे वफादार स्तम्भ थे उमाशंकर सिंह

गौरतलब है कि उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से लगातार तीन बार (2012, 2017 और 2022) विधायक चुने गए. 2022 के विधानसभा चुनाव में जब पार्टी को पूरे प्रदेश में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था तब भी उमाशंकर सिंह ने अपनी सीट पर जीत दर्ज की थी. वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक थे और मायावती के सबसे खास और भरोसेमंद सिपाहियों में गिने जाते थे. उनके निधन को बसपा और बलिया की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ी क्षति माना जा रहा है.