काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद: श्रृंगार गौरी के वीडियोग्राफी को लेकर आदेश सुरक्षित

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद: श्रृंगार गौरी के वीडियोग्राफी को लेकर आदेश सुरक्षित
फोटो: फिरोज अली/ इंडिया टुडे

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों और स्थानों की वीडियोग्राफी और कमीशन के मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन ने सुनवाई के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया है, जो अगली नियत तारीख 26 अप्रैल 2022 को सुनाया जाएगा. फिलहाल कोर्ट ने वीडियोग्राफी और कमीशन की कार्रवाई को स्थगित भी किया हुआ है.

मालूम हो कि 18 अगस्त 2021 के आदेश को दोहराते हुए 8 अप्रैल 2022 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन रविकुमार दिवाकर की अदालत ने आदेश जारी कर कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी और अन्य विग्रहों और स्थानों पर कमीशन और वीडियोग्राफी का 19 अप्रैल को करने का आदेश दिया था.

मगर वाराणसी जिला प्रशासन की ओर से सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में जिला प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए 18 अप्रैल को दाखिल प्रार्थना पत्र के बाद सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट ने कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई बुधवार के लिए सुनवाई तक टाल दिया था. बुधवार को कोर्ट में हिंदू और मुस्लिम पक्ष में जबरदस्त बहस भी हुई. जिसके बाद आदेश को सुरक्षित कर लिया गया है.

कोर्ट की कार्रवाई के बारे में बताते हुए श्रृंगार गौरी के वकील सुधीर तिवारी ने बताया कि यूपी सरकार की ओर से एक आपत्ति दी गई थी कि परिसर रेड जोन के अंतर्गत आता है, बैरिकेडिंग के अंदर है और सिर्फ मुसलमान और सुरक्षाकर्मी ही जा सकते हैं और श्रृंगार गौरी बाहर की तरफ है लिहाजा परिसर में कमीशन नहीं होना चाहिए. इसपर आपत्ति दर्ज कराई गई और बहस हुआ है.

सुधीर तिवारी ने बताया कि उन्होंने यूपी सरकार के प्रार्थना पत्र का जवाब दिया है कि उनकों सभी जगह जाने की अनुमति मिले और समस्त जगह की वीडियोग्राफी और कमीशन की अनुमति मिले. साथ ही आदेश के पालन में यूपी सरकार सहयोग करे.

उन्होंने बताया कि उनकी ओर से वीडियोग्राफी के दौरान पांचों वादिनी, 15 वकील और 3 वीडियोग्राफी वाले रहेंगे, जबकि विपक्षियों की ओर से किसी का नाम नहीं आया है. उन्होंने आगे बताया कि आदेश आने तक आगे किसी तरह की वीडियोग्राफी को कोर्ट ने रोक दिया है.

वहीं श्रृंगार गौरी की तरफ से पैरोकार जितेंद्र सिंह बिसेन ने बताया कि सरकार की ओर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, किन-किन जगहों पर वीडियोग्राफी होनी है, जबकि केस फाइल करते समय ही इस बात को पहले ही लिखा जा चुका था. सरकार की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष की संख्या कार्रवाई के दौरान पूछी गई थी जो कोर्ट में पेश कर दी गई है.

उन्होंने बताया कि जिस तरह से दिल्ली के जामा मस्जिद में जा सकते हैं और दुनियाभर का पर्यटक वहां जाता है तो तथाकथित ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर यह कहा जाता है कि सिर्फ सुरक्षाकर्मी और मुसलमान जा सकते हैं तो सवाल यह है कि सुरक्षाकर्मियों में भी सभी धर्मों के लोग रहते हैं. यही जवाब न्यायालय में दिया गया है.

जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा कि प्लांट नंबर 9130 के पूरे की वीडियोग्राफी और कमीशन की मांग की गई है जिसमें मस्जिद भी आता है. अब आगे का निर्णय कोर्ट के आदेश के बाद ही होगा.

इस पूरे मामले में 5 वादीनियों में से एक सीता साहू ने बताया कि वे चाहती हैं कि तहखाना खोला जाए क्योंकि वहां सीता माता का रसोईया है, इसलिए वहां की वीडियोग्राफी भी होनी चाहिए, इसलिए न्यायालय से मांग की गई है कि उनको भी वहां जाने दिया जाए.

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