ज्ञानवापी केस: मुकदमे की पोषणीयता के मामले में 4 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

ज्ञानवापी केस: मुकदमे की पोषणीयता के मामले में 4 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
फाइल फोटोफोटो: यूपी तक

वाराणसी की जिला अदालत में ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में मुकदमे की पोषणीयता (मुकदमा सुनवाई के योग्य है या नहीं) के मामले पर सोमवार दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू हुई और मुस्लिम पक्ष के वकील ने दलीलें दी. अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तरीख मुकर्रर की है.

अहम बिंदु

सुनवाई से पहले कोर्ट रूम के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. ऐसा माना जा रहा था कि आज 1991 के वर्शिप एक्ट की रोशनी में सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत अदालत फैसला सुना सकती है. हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 4 जुलाई की तरीख दे दी है. अब जिला अदालत 4 जुलाई को मामले में सुनाई करेगी.

ध्यान देने वाली बात है कि उपासना स्थल कानून ये कहता है कि ऐसे किसी धार्मिक स्थल के स्वरूप में 15 अगस्त 1947 के बाद संपरिवर्तन हुआ है. ऐसे में इसपर फाइल किया गया कोई वाद, अपील या कार्यवाही उपशमित नहीं होगी. यानी ऐसे प्रत्येक वाद, अपील या कार्यवाही का निपटारा उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा. एक्ट में ये भी कहा गया है कि इस अधिनियम की कोई भी बात उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबारी मस्जिद के रूप में लागू नहीं होगी. यानी 15 अगस्त 1947 के बाद किसी भी धार्मिक स्थल का जो स्वरूप है वो बना रहेगा. उसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता है.

सीपीसी (सिविल प्रक्रिया संहिता) का ऑर्डर 7 नियम 11 ये कहता है कि जबसे ये एक्ट लागू हुआ है तब से ऐसा कोई भी वाद अदालत में जा ही नहीं सकता है. ये ऑर्डर 7 नियम 11 निषिद्ध करता है ऐसे वाद को अदालत तक जाने में. ज्ञानवापी मामले में अब वाराणसी की जिला अदालत ये तय करेगी कि उपासना स्थल के दायरे में ये वाद आता है या नहीं आता है.

बता दें कि इससे पहले मामले में शुक्रवार को कोर्ट ने मस्जिद पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनी थीं. सोमवार को भी मस्जिद पक्ष की दलीलों से ही मामले की सुनवाई एक बार फिर शुरू हुई है. अदालत सर्वे की कार्रवाई के दौरान ली गईं फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग वादी और प्रतिवादी पक्ष को उपलब्ध करा सकती है. गौरतलब है कि मस्जिद पक्ष के वकीलों ने शुक्रवार को कोर्ट से ऐसा न करने की मांग की थी.

अहम बिंदु

गौरतलब है कि दिल्ली निवासी राखी सिंह तथा अन्य की याचिका पर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने पिछली 26 अप्रैल को ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराए जाने का निर्देश दिया था.

सर्वे का यह काम पिछली 16 मई को मुकम्मल हुआ था, जिसकी रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की गई थी. हिंदू पक्ष ने सर्वे के अंतिम दिन ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था, जिसे मुस्लिम पक्ष ने नकारते हुए कहा था कि वह शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है.

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो शीर्ष कोर्ट ने वाराणसी के जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वह मेरिट के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने से पहले सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7, नियम 11 के तहत दायर ज्ञानवापी मस्जिद के मुकदमे की स्वीकार्यता पर फैसला करें.

फाइल फोटो
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