सोनभद्र: 7 सालों से है यहां यात्री कर रहे बस का इंतजार, 25 लाख से बनकर तैयार हुआ था स्टैंड

सोनभद्र: 7 सालों से है यहां यात्री कर रहे बस का इंतजार, 25 लाख से बनकर तैयार हुआ था स्टैंड
फोटो - कौशलेंद्र, यूपी तक

Sonbhadra News: सोनभद्र के घोरावल विधानसभा में बना हुआ रोडवेज बस स्टेशन आज पिछले सात सालों से विरान और उजाड़ पड़ा हुआ है. यात्री पिछले सात सालों से यहां बस के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यात्रियों के मुताबिक सपा शासनकाल में कुछ दिनो तक तो बसों का संचालन हुआ. लेकिन जैसे ही सरकार बदली वैसे ही यहां बसों का आना बंद हो गया. सपा सरकार में इसी विधानसभा से विधायक रहे रमेश चंद्र दुबे के मुताबिक आज़ादी के बाद से यहां बस स्टेशन की अत्याधिक मांग थी जिसे जमीन दान में मांग कर पूरा किया गया.

अहम बिंदु

वहीं दूसरी तरफ रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि रास्ता और जगह का सही चुनाव नहीं किया गया. यही वजह है कि यहां बसों का संचालन करना काफी मुश्किल है.

घोरावल विधानसभा में यात्रियों के साथ ही रोडवेज का बस स्टेशन यहां बसों का इंतजार पिछले सात सालों से कर रहा है. यात्रियों के मुताबिक उन्हें यात्रा करने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. सपा शासनकाल में बना ये स्टेशन कुछ महीनो तक तो गुलज़ार रहा लेकिन जैसे ही सरकार बदली यहां की सूरत ही बदल गई. स्थानीय ग्रामीण शिव शंकर ने यूपी तक को बताया कि रमेश दुबे जब विधायक थे तो उन्होंने बस स्टैंड शुरू करवाया था. जब तक वह विधायक थे तब तक चालू था, अब वहां कोई नहीं जाता. वर्तमान विधायक का पता नहीं है. रोडवेज न होने से सवारी का इंतजार करना पड़ता है.

वहीं इस रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण करवाने वाले घोरावल विधानसभा से पूर्व विधायक रमेश चंद्र दुबे के मुताबिक आज़ादी के बाद से यहां बस स्टेशन नहीं था. यहां इसकी अत्याधिक मांग थी. काफी प्रयास के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस स्टेशन की स्वीकृति प्रदान की और 25 लाख रुपए स्वीकृत किए. यही नहीं इस स्टेशन के लिए जमीन भी दान में मिली. जिसे एक स्थानीय व्यापारी ने दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि आज सरकार की उपेक्षापूर्ण नीतियों की वजह से ये स्टेशन उजाड़ और विरान पड़ा हुआ है.

इस बारे में सोनभद्र डिपो के एआरएम छेदी प्रसाद वर्मा का कहना है कि जगह का चयन ही गलत किया गया, रास्ता सही नहीं है. साथ ही अगर एक भारी वाहन आ जाए तो दूसरे का आना मुश्किल है. वहां रास्ता काफी संकरा है, बस निकल नहीं सकती. रास्ता अभी बना नहीं है. सवारी आने-जाने की सुविधा हो जाए. यात्री वहां आयेंगे तभी वहां बस आ सकेगी. तीन बार गाड़ी वहां खड़ी किया गया लेकिन वहां कोई पूछने नहीं आया की गाड़ी कब चलेगी. आज तक किसी ने कोई मांग किया कि बस कब चलेगी और न ही शिकायत किया. यात्री वहां जाते नहीं इसलिए बंद कर दिया गया है. स्टेशन का चयन गलत स्थान पर किया गया है. उसे बाईपास पर या नगर में बनना चाहिए था.

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