ताजमहल को लेकर हाईकोर्ट में एक और याचिका, इस बार भगवा पहनकर जाने की मांगी अनुमति

ताजमहल को लेकर हाईकोर्ट में एक और याचिका, इस बार भगवा पहनकर जाने की मांगी अनुमति
इलाहाबाद हाई कोर्टफोटो: पंकज श्रीवास्तव

आगरा में यमुना नदी के दक्षिणी तट पर सफेद संगमरमर से बना ताजमहल वैसे तो यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल है. लगभग 42 एकड़ में फैला और हर किसी के दिल को लुभाने वाला ताजमहल एक बार फिर सुर्खियों का केंद्र बिंदु बन गया है, लेकिन इस बार अपनी खूबसूरती को लेकर नहीं बल्कि विवाद को लेकर चर्चा में है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में इसके बंद 22 कमरों को खोलने को लेकर चल रही सुनवाई के बीच अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी बीते मंगलवार को एक अंतरिम राहत याचिका दाखिल की गई है. लखनऊ खंडपीठ में भाजपा नेता द्वारा दाखिल याचिका के बारे में आपने सुना ही होगा अब हम बताते हैं ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल अंतरिम राहत याचिका में क्या कहा गया है और इसके दूर तलक मायने क्या होने वाले हैं.

अहम बिंदु

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दाखिल याचिका में कमेटी बनाकर जहां ताजमहल के बंद कमरों को खुलवाने, वीडियोग्राफी करवाने और हिंदू स्थान होने से संबंधित तथ्य संकलन करने का आग्रह किया गया है. वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल अंतरिम राहत याचिका में ताजमहल में धर्म दंड लेकर भगवा वस्त्र पहनकर प्रवेश की अनुमति को लेकर है. बीते मंगलवार 10 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह अंतरिम राहत प्रार्थना पत्र अयोध्या के तपस्वी छावनी के जगतगुरु परमहंस आचार्य और वृंदावन के महेश्वर धाम के महंत धर्मेंद्र गोस्वामी की तरफ से उनके अधिवक्ता अभिषेक तिवारी ने दाखिल की है.

इस याचिका में 26 अप्रैल का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उक्त दिन अयोध्या के जगत गुरु परमहंस आचार्य आगरा में थे. वह ताजमहल घूमने जाना चाहते थे, लेकिन ताजमहल के प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारियों ने धर्मदंड लेकर और भगवा कपड़े पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं दी. जबकि अगले दिन 27 अप्रैल को एक अन्य व्यक्ति को धर्मदण्ड और भगवा कपडे़ पहनकर ताजमहल के भीतर जाने की इजाजत दे दी गयी. इसीलिए धार्मिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए आगरा के ताजमहल मे भगवा वस्त्र में धर्म दंड लेकर करने संबंधी आदेश जारी किया जाए.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कुछ ऐसे तथ्यों का भी उल्लेख किया गया है जिसके मायने बड़ी दूर तलक जाते हैं. इस याचिका में भूमिका के तौर पर जिन तथ्यों का जिक्र किया गया है उसमें कहा गया है की ताजमहल को लेकर कुछ रहस्य हैं और कुछ इतिहासकार इसे हिंदू मंदिर कहते हैं. इसके अंदर के हिस्से के 20 कमरे बंद हैं. इसको देखने की ताजमहल प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं है. लिहाजा याचीगण जिसमे जगतगुरु परमहंस आचार्य और वृंदावन के महेश्वर धाम के महंत धर्मेंद्र गोस्वामी ताजमहल भ्रमण के दौरान इसकी जांच पड़ताल भी करना चाहते हैं.

जांच पड़ताल का केंद्र यह होगा कि ताजमहल को लेकर जो हिंदू मंदिर होने की चर्चा है उसमें कितनी सच्चाई है. यही ग्राउंड इस पूरी याचिका का मूल तथ्य है. ऊपरी तौर पर तो यह याचिका ताजमहल में धर्मदण्ड लेकर भगवा वस्त्र पहन प्रवेश की अनुमति को लेकर है, लेकिन जिस तरह इसमें भ्रमण के दौरान निरीक्षण करने का जिक्र है इसके अपने आपमें बहुत कुछ मायने है.

इनको बनाया गया है प्रतिवादी

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में भारतीय कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव , एएसआई के डायरेक्टर, आगरा जनपद के जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी, ताजमहल के प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारी इन सभी को प्रतिवादी बनाया गया है. यानि इन सभी को अपना पक्ष इस मामले पर प्रस्तुत करना होगा. जिसके बाद हाईकोर्ट इसको लेकर अपना फैसला सुनाएगी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट
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