'अगर मुस्कान से आमना-सामना हुआ तो...' फैसले से ठीक पहले सौरभ की मां ने बताया वो सवाल!
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत के परिवार को 14 अक्टूबर को अदालत के फैसले का इंतजार है. सौरभ की मां और बड़े भाई ने आज तक से बातचीत में डेढ़ साल की कानूनी लड़ाई, गवाहों की गवाही और आरोपियों के व्यवहार के बारे में बताया.
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Blue Drum Case: मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में फैसले की घड़ी के बीच उनके परिवार की निगाहें अदालत पर टिकी हैं. करीब डेढ़ साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे सौरभ की मां और बड़े भाई का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे और भाई को खोने के बाद लंबा वक्त कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हुए बिताया है. परिवार को उम्मीद है कि अदालत आरोपियों को कड़ी सजा देगी. उनकी मांग है कि सौरभ की हत्या के दोषियों को फांसी दी जाए.
आज तक से बातचीत में सौरभ के बड़े भाई और मां ने केस की सुनवाई, गवाहों की गवाही, आरोपियों से कोर्ट में मुलाकात और परिवार पर बीते वक्त के बारे में बताया. बातचीत में सौरभ की बेटी की कस्टडी का मुद्दा भी सामने आया. मां ने कहा कि अगर बच्ची के नाना-नानी राजी हों, तो वे उसे अपने पास रखने के लिए तैयार हैं.
'हमने डेढ़ साल लड़ाई लड़ी, अब इंसाफ मिलना चाहिए'
सौरभ के बड़े भाई ने कहा कि परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि अदालत उन्हें न्याय दे. उन्होंने आरोपियों के लिए फांसी की मांग करते हुए कहा कि दोनों ने उनके भाई के साथ बहुत बुरा किया है. उन्होंने बताया कि इससे पहले उनका परिवार कभी कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ा था. सौरभ की हत्या के बाद उन्हें पहली बार कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. इस दौरान बचपन के दोस्त अंकित धानक ने उनकी मदद की. अंकित ने उन्हें अपने बॉस और वकील विजय बहादुर से मिलवाया, जिन्होंने केस लड़ा.
सौरभ के भाई के मुताबिक, केस में गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ गवाही दी. परिवार को उम्मीद है कि अदालत इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाएगी. उन्होंने कहा कि केस मजबूती से लड़ा गया है और अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है.
कोर्ट में आरोपी दिखे, लेकिन भाई को पछतावा नजर नहीं आया
सौरभ के बड़े भाई ने बताया कि कोर्ट में उनकी आरोपियों से आमने-सामने मुलाकात हुई थी. हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें आरोपियों के चेहरे पर पछतावे का कोई भाव नजर नहीं आया.
उनका आरोप है कि आरोपी नजरें चुराते दिखाई दिए. परिवार के लिए यह बात भी तकलीफदेह है कि जिस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी, उसके बाद भी उन्हें आरोपियों के व्यवहार में पछतावा नहीं दिखा. परिवार की मांग साफ है कि सौरभ की हत्या के मामले में ऐसी सजा मिले, जिससे उन्हें लगे कि उनके साथ न्याय हुआ है.
सौरभ की मां बोलीं- डेढ़ साल से इंसाफ के लिए हर संभव कोशिश की
सौरभ की मां ने बताया कि बेटे की हत्या के बाद परिवार ने न्याय पाने के लिए हर स्तर पर कोशिश की. उन्होंने प्रशासन और उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने मामले में परिवार का साथ दिया. उन्होंने कहा कि गवाहों ने अदालत में उनके पक्ष में बयान दिए. परिवार को उम्मीद है कि इन गवाहियों और दूसरे सबूतों के आधार पर उन्हें न्याय मिलेगा.
मां ने कहा, "हमने हर तरह से प्रयास किया है. प्रशासन और दूसरे लोग हमारे साथ खड़े रहे. सबने हमारा साथ दिया और हमें यहां तक पहुंचाया कि अब न्याय मिलने जा रहा है." सौरभ की मां अब भी यही सवाल करती हैं कि आखिर उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया गया.
'बेटी को अपने पास रखना चाहते हैं', मां ने बताई इच्छा
बातचीत में सौरभ की बेटी की कस्टडी का मुद्दा भी उठा. सौरभ की मां ने कहा कि अगर बच्ची के नाना-नानी राजी होते हैं, तो वह उसे अपने पास रखने के लिए तैयार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बच्ची को अपने परिवार में रखना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए दूसरी तरफ की सहमति भी जरूरी है.
मां ने बताया कि हत्या से पहले उनकी पोती अक्सर उनके घर आती थी. वह उनसे अपनी पसंद का खाना बनवाती थी और परिवार के साथ समय बिताती थी. सौरभ के साथ वह अपने दादा-दादी के घर आती-जाती थी, लेकिन सौरभ की हत्या के बाद परिस्थितियां बदल गईं. मां का कहना है कि इसके बाद बच्ची को उनसे मिलने नहीं दिया गया.
'अब भी समझ नहीं आता कि उसने ऐसा कैसे किया'
सौरभ की मां ने बातचीत में कहा कि बेटे की हत्या को याद करके उन्हें आज भी यकीन नहीं होता कि ऐसा कैसे हो गया. उन्होंने कहा कि लोग नशे की बात करते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि कोई इस तरह की वारदात कैसे कर सकता है.
उन्होंने आरोपियों के लिए फांसी की मांग दोहराई. मां का कहना है कि अगर उन्हें मुस्कान से बात करने का मौका मिला, तो वह सबसे पहले यही पूछेंगी कि उसने सौरभ की हत्या क्यों की.
क्या है सौरभ राजपूत हत्याकांड? जानिए पूरा बैकग्राउंड
मामला मार्च 2025 में सामने आया था. सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे. उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर सौरभ की हत्या करने का आरोप लगा था.
पुलिस जांच के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की गई. इसके बाद शव के टुकड़े किए गए और उसे एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया. यही वजह है कि मामला देशभर में 'नीला ड्रम हत्याकांड' के नाम से चर्चित हुआ.
जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था. मामले में अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य और दूसरे सबूतों के साथ गवाहों के बयान अदालत में पेश किए. मुकदमे के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए और कुल 126 सुनवाइयां हुईं.
30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ की हत्या का दोषी करार दिया था. अदालत में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी. अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी.
