सौरभ राजपूत हत्याकांड: कोर्ट में आरोपियों के चेहरे पर नहीं दिखा कोई पछतावा, भाई ने बयां किया डेढ़ साल का दर्द
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परिवार के बड़े भाई ने बताया कि कोर्ट में आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा, वे चाहते हैं कि न्याय मिले और आरोपियों को सजा मिले. मामले में डेढ़ साल का संघर्ष रहा.
चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार का दर्द एक बार फिर सामने आया है. सौरभ के बड़े भाई ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान पिछले डेढ़ साल के लंबे संघर्ष, कोर्ट की कार्यवाही और आरोपियों (मुस्कान और साहिल) से आमना-सामना होने का अनुभव साझा किया है. परिवार ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की पुरजोर मांग की है.
डेढ़ साल का संघर्ष और न्याय की उम्मीद
सौरभ के भाई ने बताया कि उनके परिवार के लिए पिछले डेढ़ साल का सफर बेहद कठिन रहा है. इस दौरान उन्हें कोर्ट-कचहरी के मामलों का कोई अनुभव नहीं था. लेकिन उनके बचपन के दोस्त और वकील के सहयोग से उन्हें सही मार्गदर्शन मिला. वरिष्ठ वकील विजय बहादुर के नेतृत्व में इस केस को बेहद मजबूती से लड़ा गया है. परिवार का दावा है कि उन्होंने कोर्ट में हर मुमकिन गवाह को पेश किया है जिससे उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालत उनके भाई को न्याय दिलाएगी.
'चेहरे पर पछतावा नहीं, आंखों में था चोर'
जब भाई से पूछा गया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब उनका सामना मुस्कान और साहिल से हुआ, तो क्या उनके चेहरे पर कोई पछतावा या गिल्ट नजर आया? इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपियों के चेहरे पर कोई पश्चाताप नहीं था.
उन्होंने कहा, "उनके चेहरे या आंखों से ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि उन्हें अपनी गलती का कोई पछतावा है. उनके मन में तो बस चोर छिपा हुआ था, वे लगातार इधर-उधर आंखें चुराते नजर आए." परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने उनके भाई को बेहद बेरहमी से मौत के घाट उतारा है, इसलिए कानून के तहत उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए.
