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3KG की चांदी की हार, 1 KG की चरण पादुका फिर भी नहीं मिली रसीद..., मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा ने टिन्नू यादव को सौंपे थे आभूषण? SIT ने तेज की जांच

Ram Mandir Donation News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच 3 किलो चांदी का हार और 1 किलो चांदी की चरण पादुका अर्पित करने का दावा सामने आया है. रसीद न मिलने के आरोप के बाद SIT पूरे मामले, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.

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Ram Mandir Donation News
Tinnu Yadav And Aacharya Vinod Mishra (Photo: AI)
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Vinod Mishra Ram Mandir Donation News: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच एक बार फिर तेज हो गई है. विशेष जांच टीम (SIT) अब उन श्रद्धालुओं और दानदाताओं से पूछताछ कर रही है जिन्होंने रामलला के लिए बहुमूल्य आभूषण और धार्मिक सामग्री भेंट की थी. इसी बीच एक नया दावा सामने आया है मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा से जानकारी मिली है कि उन्होंने रामलला के लिए लगभग 3 किलोग्राम चांदी का हार और करीब 1 किलोग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका अर्पित की थी, जिन्हें मंदिर परिसर में रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को सौंपा गया था. उनका कहना है कि इतनी मूल्यवान भेंट देने के बावजूद उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक रसीद नहीं मिली.

टिन्नू यादव को सौंपे गए आभूषण का दावा

महंत आचार्य विनोद मिश्रा, जो अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर से जुड़े हैं, उन्होने दावा किया है कि ये कीमती आभूषण मंदिर परिसर में रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को सौंपे गए थे. उनके अनुसार, दानदाता अनिल विश्वकर्मा जौनपुर के निवासी हैं और मुंबई में व्यवसाय करते हैं. उन्होंने रामलला के लिए विशेष चांदी का हार और 64 दिव्य चिह्नों से युक्त चरण पादुका अर्पित करने का संकल्प लिया था. महंत का कहना है कि इस पूरे कार्य में कोई स्पष्ट रसीद या आधिकारिक दस्तावेज दानदाता को नहीं दिया गया.

200 किलोमीटर नंगे पैर यात्रा कर पहुंचे थे श्रद्धालु

महंत विनोद मिश्रा के अनुसार अक्टूबर 2025 में अनिल विश्वकर्मा अपने पूरे परिवार के साथ लगभग 200 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए अयोध्या पहुंचे थे. इस यात्रा में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. परिवार ने पहले मंदिर में पूजन-अर्चन किया और फिर रामलला के दर्शन किए. इसके बाद मंदिर परिसर में विशेष भेंट अर्पित की गई, जिसे लेकर बाद में विवाद सामने आया. महंत का कहना है कि श्रद्धालुओं की यह यात्रा आस्था से जुड़ी थी.

रसीद न मिलने का आरोप

महंत के अनुसार, मंदिर पहुंचने पर उनकी मुलाकात टिन्नू यादव से हुई, जिन्होंने उन्हें विशेष मार्ग से गर्भगृह तक पहुंचाया. पुजारियों द्वारा आभूषण कुछ समय के लिए भगवान के चरणों में रखे गए, जिसके बाद उन्हें टिन्नू यादव ने अपने पास रख लिया. आरोप है कि दानदाता परिवार को बताया गया था कि जांच के बाद रसीद दी जाएगी, लेकिन बाद में कोई दस्तावेज नहीं दिया गया. महंत विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें बताया गया कि चांदी के इन आभूषणों को गलाकर अन्य उपयोग के लिए सुरक्षित कर लिया गया है. इस जानकारी से दानदाता परिवार आहत हुआ और पूरे मामले पर सवाल खड़े हुए.

SIT रिपोर्ट पर टिकी नजरें

SIT अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दान की वस्तुओं का रिकॉर्ड किस तरह रखा गया और क्या नियमों का पालन हुआ या नहीं. जांच टीम यह भी देख रही है कि किन लोगों की भूमिका इस प्रक्रिया में रही और क्या किसी स्तर पर अनियमितता हुई. फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा.