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देवरिया हत्याकांड में गोली चलाने के आरोपी नवनाथ मिश्रा ने बताई ऐसी बात की पलट गई पूरी कहानी

संतोष शर्मा

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Deoria News: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक ही परिवार के 5 समेत कुल 6 लोगों की हत्या मामले में एक ट्विस्ट सामने आया है. बता दें कि यहां जमीनी विवाद के चलते पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम चंद्र यादव की हत्या के बाद उनके पक्ष के लोगों ने सत्यप्रकाश दुबे के घर हमला बोल दिया था. इसके बाद हुए संघर्ष में सत्यप्रकाश, उनकी पत्नी और तीन बच्चों की नृशंस हत्या कर दी गई थी. देवरिया में हुए नरसंहार में कहा गया कि सत्यप्रकाश दुबे के पक्ष की ओर से प्रेमचंद यादव को किसी ने फोन कर बुलाया था. मगर पुलिस की जांच और गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पूछताछ से पता चला है कि 2 अक्टूबर की सुबह प्रेमचंद यादव को कोई फोन नहीं किया गया था. हालांकि पुलिस की जांच जारी है, लेकिन प्रेम चंद्र यादव को कॉल कर बुलाने के तथ्य पर अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.

देवरिया के फतेहपुर इलाके में बीते 2 अक्टूबर को जमीनी विवाद में सत्य प्रकाश दुबे समेत उनके परिवार के पांच लोगों की हत्या और उससे पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम चंद्र यादव की हत्या का मामला राजनीतिक रंग ले चुका है. मगर इस सामूहिक नरसंहार की घटना से जुड़े तमाम पहलू भी बहुत अहम होते जा रहे हैं. घटना के बाद कहा गया कि 2 अक्टूबर की सुबह प्रेमचंद यादव को किसी का फोन आया. इसके बाद वह अपनी मोटरसाइकिल से सत्य प्रकाश दुबे के घर पहुंचे और यहां पर दुबे परिवार ने प्रेमचंद यादव की पीट-पीट कर हत्या कर दी.

प्रेम यादव की पत्नी ने किया था ये दावा

प्रेमचंद यादव की पत्नी ने भी दावा किया कि वह चाय बना रही थीं, तभी उनके पति को किसी ने कॉल की और वह 2 मिनट में आने की बात कह कर घर से निकल गए थे.

आखिर वह कौन था जिसने प्रेम यादव को फोन किया था, जिसके बाद वह सीधे सत्य प्रकाश दुबे के घर पहुंच गए थे? इसकी तफ्तीश में जुटी देवरिया पुलिस ने प्रेम यादव के फोन के कॉल डिटेल को भी खंगाला है. आधिकारिक तौर पर तो नहीं लेकिन एक विभागीय सूत्र के अनुसार प्रेम यादव के फोन पर 2 अक्टूबर की सुबह कोई कॉल ही नहीं आई थी. दावा है कि इस बात की पुष्टि प्रेमचंद यादव के ड्राइवर और उसके सबसे करीबी नवनाथ मिश्रा ने भी पुलिस से पूछताछ में की है. यह अलग बात है कि पुलिस अब तक प्रेमचंद यादव के फोन को बरामद नहीं कर पाई है.

मिली जानकारी के अनुसार, एक अक्टूबर की देर रात से दो अक्टूबर की सुबह घटना के समय तक प्रेम यादव के मोबाईल पर किसी का फोन नहीं आया था. दावा है कि प्रेम यादव खुद सत्य प्रकाश दुबे के घर पहुंचे थे, जहां कहासुनी और मारपीट होने लगी और दुबे परिवार ने प्रेम चंद यादव की हत्या कर दी. जब इसकी जानकारी प्रेम के घर वालों और गांव के लोगों को हुई तो सत्य प्रकाश दुबे व उनके परिवार के चार सदस्यों की गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला कर नृशंस हत्या कर दी गई.

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गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस अभी तक 21 अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है. इसमें प्रेम यादव के पिता रामभवन यादव, छोटे भाई रामजी यादव और प्रेमचंद यादव का ड्राईवर नवनाथ मिश्रा उर्फ पट्टू शामिल है. इसमें कुल नामजद 27 अभियुक्त हैं, जबकि 50 अज्ञात हैं.

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