कानपुर क्राइम

कानपुर: लैब टेक्नीशियन के अपहरण होने के करीब 16 महीने बाद CBI ने दर्ज की एफआईआर

कानपुर के चर्चित लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के अपहरण और संदिग्ध हत्या के मामले में सीबीआई सक्रिय हो गई है. 27 वर्षीय संजीत यादव के अपहरण होने के करीब 16 महीने बाद सीबाआई ने सोमवार, 11 अक्टूबर को मामला दर्ज किया. सीबीआई ने अब उत्तर प्रदेश पुलिस से जांच अपने हाथों में ले ली है.

एफआईआर के अनुसार, संजीत यादव 22 जून 2020 को सुबह करीब 8 बजे अपने कानपुर स्थित आवास से धनवंतरी अस्पताल में काम करने के लिए निकले थे, जिसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटे.

क्या है पूरा मामला?

संजीत के पिता द्वारा 26 जून, 2020 को दायर शिकायत में कहा गया था कि उन्हें उसी इलाके के एक परिवार की भूमिका पर संदेह है जो पीड़ित की बहन से शादी करना चाहता था. संजीत के पिता के अनुसार, “जब मुझे उस व्यक्ति के बारे में पता चला, तो मैंने अपनी बेटी से शादी करने से इनकार कर दिया और तब से वे मुझे धमकी दे रहे थे. मुझे परिवार से कई धमकी भरे कॉल और संदेश मिले.”

हांलाकि, कानपुर पुलिस ने अपनी जांच के दौरान कथित तौर पर पाया था कि संजीत का अपहरण फिरौती के लिए किया गया था और उनका शव एक नहर में फेंक दिया गया था. हालांकि संजीत का शव पुलिस को कभी नहीं मिला.

कानपुर पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था

कानपुर पुलिस ने मामले में कुलदीप, ज्ञानेंद्र यादव, नीलू, रामजी और प्रीति के रूप में पहचाने गए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार, कुलदीप और रामजी लैब में संजीत के सहयोगी थे और उनके दोस्त भी थे, जिन्होंने उसका अपहरण करने और फिरौती मांगने की साजिश रची थी.

पुलिस ने यह दावा किया था कि अपहरण के बाद संजीत को किराए के घर में रखा गया था. जब उन्होंने 26 जून को भागने की कोशिश की तो अपहरणकर्ताओं ने रस्सी से उनकी गला दबाकर हत्या कर दी और शव को अगले दिन पांडु नहर में फेंक दिया.

संजीत के परिवार ने पुलिस पर खड़े किए थे सवाल

संजीत के परिवार ने दावा किया कि संजीत की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद 29 जून को उन्हें अपहरणकर्ताओं का फिरौती के लिए पहला फोन आया था. संजीत के परिवार के अनुसार, “अगर पुलिस कह रही है कि 26 जून को संजीत की हत्या कर दी गई थी और अगले दिन शव को फेंक दिया गया था, तो उन्हें 29 जून को हत्या के बाद पहली कॉल क्यों मिली?” परिवार ने निलंबित बर्रा निरीक्षक रंजीत राय और अपहरणकर्ताओं के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया था.

परिवार को 15 से अधिक फिरौती की कॉल आने के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया. निलंबित आईपीएस अधिकारी अपर्णा गुप्ता ने कथित तौर पर उन्हें 30 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए कहा और परिवार को आश्वासन दिया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए सभी व्यवस्था की जाएगी.

मृतक की बहन ने क्या बताया?

“पुलिस के जोर देने पर 13 जुलाई को संजीत के पिता चमन यादव 30 लाख रुपये लेकर गुजानी हाईवे गए. अपहरणकर्ताओं से करीब 30 मिनट तक बात करने के बाद उन्होंने बैग को फ्लाईओवर से रेलवे क्रॉसिंग पर फेंक दिया. हालांकि, संजीत को रिहा नहीं किया गया और फिरौती की राशि भी बरामद नहीं हुई.”

रुचि, संजीत की बहन

संजीत के पिता चमन यादव ने बताया, “इस मामले के मीडिया में आने के बाद, पुलिस ने हम पर यह कहने के लिए दबाव डाला कि हमसे कोई पैसा नहीं लिया गया. हमें संदेह है कि निलंबित बर्रा निरीक्षक सहित स्थानीय पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के साथ मिलकर फिरौती की राशि ली होगी.”

परिवार के आरोपों के बाद, आईपीएस अधिकारी अपर्णा गुप्ता को चार अन्य पुलिसकर्मियों के साथ निलंबित कर दिया गया था.

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