अग्निवीरों को सेना में रुकने का मिलेगा एक और मौका? पहले बैच के बाहर होने से पहले बड़ा बदलाव
अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने का प्रस्ताव है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बारे में जानकारी दी है.
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अग्निवीरों की सेवा अवधि को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को दो साल और सेना में काम करने का मौका मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अग्निवीरों के लिए दो साल के अतिरिक्त कार्यकाल यानी 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' को मंजूरी दी गई है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा कार्यकाल देने का फैसला किया गया है.
राजनाथ सिंह के मुताबिक, इस फैसले से उन सभी इच्छुक अग्निवीरों को चार या छह साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल होने का मौका भी मिलेगा, जो तय चयन मानकों को पूरा करेंगे. अब अग्निवीरों के लिए सेना में बने रहने का रास्ता सिर्फ शुरुआती चार साल तक सीमित नहीं रहेगा.
चार साल बाद 75 फीसदी अग्निवीरों के साथ क्या होगा?
अग्निपथ योजना के मौजूदा नियमों के तहत चार साल की सेवा पूरी होने पर अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में रखा जाता है. बाकी 75 फीसदी जवानों को सेवा से मुक्त किया जाता है.
नई व्यवस्था में इन्हीं 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने का फैसला किया गया है. वे चार साल के बजाय कुल छह साल तक सेना में सेवा दे सकेंगे.
छह साल की सेवा पूरी होने के बाद भी उनके लिए नियमित सेना में भर्ती होने का रास्ता खुला रहेगा. रक्षा मंत्री के मुताबिक, जो अग्निवीर नियमित सैनिक बनने के इच्छुक होंगे और तय चयन मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें सेना में शामिल होने का मौका मिलेगा.
इसका मतलब है कि अब अग्निवीरों को चार साल बाद ही सेना से बाहर होने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा. उन्हें दो साल और सेवा देने के साथ नियमित सैनिक बनने का एक अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा.
सेना में बदलाव के पीछे क्या है सरकार का मकसद?
राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि फैसला रक्षा बलों में लंबे समय से चल रहे ढांचागत सुधारों का हिस्सा है. सरकार का लक्ष्य सेना को कम उम्र वाली, शारीरिक रूप से अधिक सक्षम और आधुनिक तकनीक से लैस बनाना है.
उन्होंने कहा कि युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए सेना को भी नई तकनीक और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना जरूरी है. सरकार अग्निपथ योजना को केवल भर्ती की नीति नहीं, बल्कि सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के रास्ते के रूप में देख रही है.
कब पूरा होगा पहले बैच का चार साल का कार्यकाल?
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच का चार साल का कार्यकाल 2026 के आखिर में पूरा हो रहा है. तीनों सेनाओं में सेवा पूरी होने की तारीख अलग-अलग है.
नौसेना: पहले बैच का कार्यकाल 21 नवंबर 2026 को पूरा होगा.
वायुसेना: अग्निवीरों का पहला बैच 21 दिसंबर 2026 को चार साल पूरे करेगा.
थलसेना: पहले बैच के अग्निवीर 31 दिसंबर 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.
क्या है अग्निपथ योजना?
केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को तीनों सेनाओं में अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है. शुरुआती भर्ती के लिए अधिकतम उम्र सीमा 2022 में एक बार 23 साल की गई थी.
योजना के तहत अग्निवीरों को चार साल तक सेवा करनी होती है. इस दौरान उन्हें सैन्य प्रशिक्षण और सेना में काम करने का अनुभव मिलता है. चार साल पूरे होने पर अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान था.
बाकी जवानों को सेवा निधि पैकेज देकर सेवा से मुक्त किया जाता है. इस पैकेज में अग्निवीर और सरकार का योगदान शामिल होता है. नई व्यवस्था के तहत अब 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए दो साल का अतिरिक्त सेवा विकल्प भी जुड़ गया है.
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